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एमआरआई स्कैन MRI Scan in Hindi

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एमआरआई क्या है / What is MRI Scan ?

MRI Test in Hindi / MRI Scan Definition : MRI Scan मेडिकल सांइस में किसी क्रांति से कम नहीं है। एमआरआई का इस्तेमाल सर्वप्रथम 1980 में किया गया था। एमआरआई स्कैन करने में प्रभावशाली चुम्बकीय, रेडियों किरणों और कम्प्यूटर इस्तेमाल किया जाता है। एमआरआई स्कैन के माध्यम से रेडियोलोजिस्ट शरीर अंगों की विस्तृत जानकारी तस्वीरों के रूप कम्प्यूटर में ले लेता है। एमआरआई स्कैन का पूर्ण नाम मैग्नेटिक रेजोनेन्स इमेजिन्ग / Magnetic Resonance Imaging है। एमआरआई स्कैन एक्स-रे और सीटी स्कैन से अलग होता है। अकसर एक्स-रे और सीटी स्कैन लेने में विकिरणों / Radiation का इस्तेमाल किया जाता है। एमआरआई के दौरान टेस्ला चुम्बकीय शक्ति की माप इकाई होती है। जोकि निर्धारित समय पर शरीर के चित्र बनाने में मद्द करती है। जिसे 1.5 Tesla / 3 Tesla (3T) से भी जाना जाता है। एमआरआई मशीन 3 तरह की होती हैं। पहली बंद, दूसरी एक तरह से खुली, तीसरी दोनों तरह से खुली। इनके आकार भी भिन्न होते हैं। परन्तु सभी एमआरआई मशीनों का लक्ष्य रोगों का चित्रण रिर्पोट ही करना होता है। लगभग 50 तरह के जैसेकि Brain, Breast, Cervical Spine, Overies, Cervix, Chest, Disc, Head, Abdomen, Gallbladder, Heart, Joint, Kidney, Liver, Lumbar, Lymph Nodes, Lungs, Bladder, Adrenal Glands, Uterus, Appendix, Back, Bile Ducts, Blood Vessels, Bone, Bowel, Fallopian Tube, Fetus, MRA, Neck, Pancreas, Pelvis, Penis, Prostate, Scrotum, Shoulder, Spine, Spleen, Testicles, Tumor, Urethra, Vertebrae, Full Body MRI एमआरआई टेस्ट किये जा सकते हैं।

एमआरआई करवाने की क्यों जरूरी होता है / Why Need MRI Test ?

एमआरआई स्कैन से हृदय, लिवर, गर्भाश्य, अण्डाशय, मस्तिष्क, हड्डियों, जोड़ों, रक्त वहिकाओं, स्तनों, किड़नीें, ऊतकों और अन्य आन्तरिक अंगों और सम्पूर्ण शरीर की जांच बारीकी से की जा सकती है। उपकारों को शरीर में पहुंचाए बिना ही रोगों और अन्तरिक अंगों की स्थिति चित्रों के रूप में आसानी से मिल जाती है।
एमआरआई स्कैन खास सटीक रिजल्ट देता है। जिससे चिकित्सक को रोगों की समीक्षा, पहचाने और उपचार करने में आसानी रहती है।

एमआरआई मुख्य जांच / what does an MRI Scan show

  1. मस्तिष्क एम.आर.आई. स्कैन से सिर चोट, ब्रेन ट्यूमर, दिमागी बुखार, सिर दर्द सूजन, कैंसर, चोट, माइग्रेन, स्ट्राॅक, र्मिग्री की ब्रेन मैपिंग जांच की जाती है। fMRI / एफ.एम.आर.आई ब्रेन मैंपिंग की सहायता से चिकित्सक मस्तिष्क सर्जरी और उपचार करने में सहायता मिलती है।

  2. हृदय घात और वाहिनी समस्याओं में एमआरआई स्कैंन से हार्ट अटैक, कलोटिंग, ब्लाॅकेज और अन्य तरह की हृदय रोगों के लक्षणों की जांच की जाती है।

  3. हड्डियों की जांच में एमआरआई स्कैन से हड्डियों में चोट, सूजन, दर्द, हड्डियों के सक्रमण, हड्डियों में कैंसर, डिस्क स्लिप होना, हड्डियों की कमजोरी, हड्डी बढ़ने, हड्डी खिसकने से लेकर विभिन्न बोंस एमआरआई स्कैन किये जाते हैं।

  4. लिवर कैंसर, किड़नी कैंसर, अग्न्याश्य कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, मस्तिष्क कैंसर, महिलाओं में स्तन कैंसर आदि विभिन्न कैंसर लक्षणों में खास तरह के एमआरआई फंक्शनल स्कैन टेस्ट किये जाते हैं।

  5. फेड़ड़ों, गुर्दें, लिवर, हृदय, ऊतकों में विकृति, धमनियों की ब्लाॅकेज, संक्रमण, ब्लड क्लोटिंग स्थिति में अलग-अलग फंक्शनल एमआरआई किये जाते हैं।

  6. अन्य तरह की समस्याओं में जैसे शरीर में दर्द, सूजन, हार्मोंस बदलाव, नसों में दर्द, पेट दर्द, शरीर में झंझनाहट, विभिन्न तरह की गुप्त बीमारियां जिनको चिकित्सक साधारण जांच से नहीं पहचान पाता, इस स्थिति में एमआरआई टेस्ट खास फायदेमंद है। एमआरआई स्कैन करवाने से गुप्त बीमारियां आसानी से पकड़ में आ जाती हैं। जिससे समय पर सही उपचार करवाने में आसानी रहती है।

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एमआरआई स्कैन करवाने से पहले की तैयारी / MRI Scan Preparation

एमआरआई टेस्ट करवाने से पहले मरीज को निर्देंश दिये जाते हैं।
1. एमआरआई करवाने से पहले मरीज को अस्पताल द्धारा जारी किये गये कपड़े पहनाये जाते हैं। जोकि धातु रहित और आरामदायक होते हैं।

  1. एमआरआई स्कैन एक तरह से शक्तिशाली चुम्बकीय तरगों का क्षेत्र होता है। एमआरआई जांच से पहले रेडियोलोजिस्ट / चिकित्सक शरीर से अंगूठी, कड़ा, चश्मा, घड़ी, हेयरपिन, ज्वेलरी और अन्य तरह धातु चीजें अलग करवा देते हैं।

  2. यदि शरीर में सर्जरी, अंग प्रत्यारोपड, टांके, स्टंट्स, सर्जिकल क्लिप, पेसमेकर, मेडिसिन इंफ्यूजन पोर्ट, स्टेपल, प्लेट और अन्य तरह से कृत्रिम अंश आदि लगवायें हैं तो, एमआरआई जांच से पहले रेडियोलोजिस्ट / चिकित्सक को अवश्य बतलाएं।

  3. सिक्के, ज्वैलरी या अन्य रूप में धातु निर्मित वस्तुएं एमआरआई के दौरान पास नहीं ले जाई जाती हैं।

  4. महिला अगर गर्भवती है, तो भी रेडियोलोजिस्ट / चिकित्सक को पहले बतलायें।

  5. एमआरआई स्कैन अलग-अलग तरह के होते हैं, कुछ एमआरआई टेस्टों में व्यक्ति भोजन के बाद करवा सकता है। परन्तु आंतरिक कुछ खास तरह के एमआरआई स्कैन खाली पेट बिना कुछ खाये पीये करवाये जाते हैं।

एमआरआई कैसे होता है / MRI Scan Procedure

  1. गैलोलीनियम / एक विशेष कोन्ट्रास्ट डाई मरीज बांह नस पर लगाई जाती है। जिससे एमआरआई के दौरान चिकित्सक शरीर के अन्दर की गतिविधियां संरचना को देखते हैं। कोन्ट्रास्ट डाई लगने पर मरीज के मुंह का स्वाद थोड़ा बदल जाता है। मरीज को धातु जैसा हल्का स्वाद महसूस होता है। परन्तु इससे कोई नुकसान नहीं होता है।

  2. एमआरआई टेबल में मरीज को लिटाकर हाथ पैरों पर एमआरआई टेबल बेल्ट लगा दी जाती है। जिससे व्यक्ति हिले डुले नहीं। आराम से लेटा रहे और तकनीशियन को एमआरआई जांच में आसानी रहे। क्योंकि हिलने डुलने से एमआरआई पिक्स – छवि साफ नहीं आती है।

  3. एमआरआई मशीन के अन्दर प्रभावशाली चुम्बीकीय क्षेत्र होता है, जिससे व्यक्ति थोड़ा विचलित और असहज महसूस कर सकता है।

  4. एमआरआई स्कैन करने से आवेग बनने से एमआरआई दृश्य – चित्र परत रूप में कम्प्यूटर को भेजता है।

  5. एमआरआई करवाते समय मरीज को अन्दर आवाज महसूस हो सकती है। क्योंकि एमआरआई के दौरान परत रूप में छवि लेने के लिए चुम्बकीय ऊर्जा तैयार करती है। जरूरत पड़ने पर अन्दुरूनी शोर गुल से बचने के लिए धातु रहित हेडफोन, एयरप्लग, रूई का इस्तेमाल हो सकता है।

  6. एमआरआई स्कैन करवाते समय व्यक्ति को शरीर की नसें में उत्तेजना सनसनी महसूस होती है। जिससे घबराने की काई बात नहीं होती है।

  7. एमआरआई करवाने के बाद व्यक्ति पहले जैसे रूटीन कार्यों में लग सकता है।

  8. घबराहट, असहज समस्या महसूस होने पर में रेडियोलोजिस्ट / चिकित्सक एमआरआई स्कैन के दौरान अन्दर व्यक्ति से इंटरकाॅम के द्धारा बात कर सकता है।

  9. MRI Scan side effects आमतौर पर नहीं होते हैं। परन्तु एमआरआई टेस्ट के दौरान अस्थमा रोगी को घबराहट से सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। डायलिसिस और क्लोस्ट्रफोबिया (डर रोग) से ग्रसित व्यक्ति थोड़ा विचलित हो सकते हैं।

10. परन्तु आधुनिक एमआरआई मशीने पहले के मुकावले अच्छी गुणवत्ता के हैं, और सुरक्षित भी हैं। जोकि मरीज के सुविधा अनुसार बनाई गई होती हैं।

MRI Radiographer द्धारा एमआरआई स्कैन रिर्पोट आने पर चिकित्सक रोगों समस्याओं की समीक्षा कर रोगों की स्थिति अनुसार सर्जरी, उपचार, दवाईयां टीटमेंट दी जाती है। एमआरआई शरीरिक विस्तृत जांच में खास कारगर पद्धति है।

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