चाणक्य अनमोल विचार Chanakya Quotes in Hindi

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Chanakya Quotes in Hindi

कठोर वाणी अग्निदाह से भी अधिक तीव्र दुःखदायक होती है।
– चाणक्य अनमोल विचार

अग्नि सिर में स्थापित करने पर भी जलाती है। अर्थात दुष्ट व्यक्ति का कितना भी सम्मान कर लें, वह सदैव दुःख ही देता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

कल की हज़ार कौड़ियों से आज की एक कौड़ी भली। अर्थात संतोष ही सबसे बड़ा धन है।
– चाणक्य अनमोल विचार

जो व्यक्ति वर्तमान में समय का मूल्य नहीं समझता, भविष्य में उस व्यक्ति का कोई मूल्य नहीं।
– चाणक्य अनमोल विचार

सबसे बड़ा सफलता का गुरु मन्त्र है, कभी भी अपने राज़ दूसरों को मत बताएं, ये आपको बर्वाद कर सकते हैं।
– चाणक्य अनमोल विचार

अर्थ, धर्म और कर्म जीवन का आधार है।
– चाणक्य अनमोल विचार

सत्य भी यदि अनुचित लगता है, तो उसे नहीं कहना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

हर विचार को सकारात्मक और नकारात्मक दोनो तरह से सोचना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

शत्रु , ऋण और रोग को समाप्त कर देना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

जिस तरह वन में लगी अग्नि चन्दन की लकड़ी को भी जला देती है, अर्थात दुष्ट व्यक्ति किसी का भी अहित कर सकते हैं।
– चाणक्य अनमोल विचार

शत्रु की कमजोरी जानने तक उसे अपना मित्र बनाए रखें।
– चाणक्य अनमोल विचार

मित्रों के संग्रह से बल की प्राप्ति होती है।
– चाणक्य अनमोल विचार

यदि स्वयं के हाथ में विष फ़ैल रहा हो तो, उसे काट देना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

भूख के समान दूसरा कोई शत्रु नहीं है।
– चाणक्य अनमोल विचार

अन्न के बढ़कर और कोई दूसरा धन नहीं है।
– चाणक्य अनमोल विचार

शेर भूखा होने पर भी घास नहीं खाता।
– चाणक्य अनमोल विचार

एक ही देश के दो शत्रु परस्पर मित्र हो सकते हैं।
– चाणक्य अनमोल विचार

आपातकाल स्थिति में स्नेह करने वाला ही मित्र होता है।
चाणक्य अनमोल विचार

एक बिगड़ैल गाय सैकड़ों कुत्तों से ज्यादा श्रेष्ठ है। अर्थात एक विपरीत स्वभाव
का परम हितैषी व्यक्ति, उन सैकड़ों लोगों से श्रेष्ठ है, जो आपकी चापलूसी करते
हैं।
– चाणक्य अनमोल विचार

हर प्रकार के भय से बदनामी का भय सबसे बड़ा होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

आलसी का वर्तमान होता है, और नही भविष्य।
– चाणक्य अनमोल विचार

पहले मंजिल निश्चय करिएँ, फिर कार्य आरम्भ करें।
– चाणक्य अनमोल विचार

कल के मोर से आज का कबूतर भला। अर्थात संतोष सब बड़ा धन है।
– चाणक्य अनमोल विचार

किसी भी कार्य में पल भर भी विलम्ब करें।
– चाणक्य अनमोल विचार

लोहे को लोहे से ही काटना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

विद्या ही निर्धन के लिए धन है।
– चाणक्य अनमोल विचार

सोने धातु के साथ मिलकर चांदी भी सोने जैसी चमक दिखाई पड़ती है अर्थात सत्संग का प्रभाव मनुष्य पर अवश्य पड़ता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

सांप को दूध पिलाने पर विष ही बढ़ता है, कि अमृत।
– चाणक्य अनमोल विचार

संकट में बुद्धिविवेक ही काम आती है।
– चाणक्य अनमोल विचार

यदि माता दुष्ट प्रवृति की है, तो उसे भी त्याग देना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

किसी लक्ष्य की सिद्धि में कभी भी शत्रु का साथ दें।
– चाणक्य अनमोल विचार

विद्या को तुम से कोई भी नहीं चुरा सकता।
– चाणक्य अनमोल विचार

जिसके पास धैय नहीं है, उसका वर्तमान है ना ही भविष्य।
– चाणक्य अनमोल विचार

प्रबल शत्रु को कमजोर समझकर दृढ साहस और जोश के साथ उस पर आक्रमण करे।
– चाणक्य अनमोल विचार

शत्रु के गुणों को भी ग्रहण कर लेना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

सदैव अपने स्थान पर बने रहने से ही मनुष्य पूजा जाता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

दोषहीन कार्यों का होना हमेशा दुर्लभ होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

जो व्यक्ति जिस कार्ये में कुशल हो, उसे उसी कार्ये में लगना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

हमेशा ढेकुली नीचे सिर झुकाकर ही कुँए से जल निकालती है। अर्थात कपटी या पापी व्यक्ति हमेशा मधुर वचन बोलकर अपना काम निकालते है।
– चाणक्य अनमोल विचार

अपने से अधिक बलशाली और समान बल वाले से शत्रुता नहीं रखें।
– चाणक्य अनमोल विचार

समय का ध्यान नहीं रखने वाला व्यक्ति अपने जीवन में सफल नहीं हो सकता।
– चाणक्य अनमोल विचार

योग्य सहायकों के बिना सही निर्णय करना बड़ा कठिन होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

आग में और आग नहीं डालनी चाहिए। अर्थात क्रोधी व्यक्ति को अधिक क्रोध नहीं दिलाना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

व्यसनी दुराचारी व्यक्ति कभी सफल नहीं हो सकता।
– चाणक्य अनमोल विचार

चंचल चित वाले व्यक्ति के कार्य कभी समाप्त नहीं होते।
– चाणक्य अनमोल विचार

सदैव भाग्य पुरुषार्थी के पीछे चलता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

शत्रु दण्डनीति के ही योग्य होना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

धूर्त व्यक्ति अपने स्वार्थ मात्र के लिए दूसरों की सेवा करते हैं।
– चाणक्य अनमोल विचार

मंत्रणा को गुप्त रखने से ही कार्य सिद्ध होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

जिसकी आत्मा संयमित होती है, वही आत्म विजयी होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

दूध के लिए हथिनी पालने की जरुरत नहीं होती। अर्थात आवश्कयता के अनुसार ही साधन जुटाने चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

वृद्धजनों की सेवा ही विनय का आधार है।
– चाणक्य अनमोल विचार

खास विचार अथवा गुप्त मंत्रणा को गुप्त रखने पर कार्य नष्ट हो जाता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

कल का कार्य आज ही कर ले।
– चाणक्य अनमोल विचार

ज्ञान से राजा अपनी आत्मा का परिष्कार और सम्पादन करता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

जहां लक्ष्मी रूप धन का निवास होता है, वहां सहज ही सुखम्पदा जुड़ती है।
– चाणक्य अनमोल विचार

धन की गोपनीयता को सर्वोत्तम माना जाना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

योग्य सहायकों के बिना निर्णय करना बड़ा कठिन होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

प्रकृति, सहज रूप से प्रजा के संपन्न होने से नेताविहीन राज्य भी संचालित होता रहता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

दुष्ट स्त्री बुद्धिमान व्यक्ति के शरीर को भी निर्बल बना सकती है।
– चाणक्य अनमोल विचार

मनुष्य की मुख वाणी ही विष और अमृत की खान है।
– चाणक्य अनमोल विचार

दुष्ट की मित्रता से शत्रु की मित्रता अच्छी होती है।
– चाणक्य अनमोल विचार

कठिन समय के लिए धन जमा करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

इन्द्रियों पर विजय का आधार विनम्रता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

वृद्ध सेवा अर्थात ज्ञानियों की सेवा से ही ज्ञान प्राप्त होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

आत्म विजयी लोग सभी प्रकार की संपत्ति एकत्र करने में समर्थ होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

प्रकर्ति का कोप सभी कोपों से बड़ा होता है। अर्थात प्रकृति ही नाशक है।
– चाणक्य अनमोल विचार

शासक को स्वयं योग्य बनकर योग्य प्रशासकों की सहायता से शासन करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

स्वाभिमानी व्यक्ति प्रतिकूल विचारों को सम्मुख रखकर, दुबारा उन पर विचार करता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

अविनीत व्यक्ति को स्नेही होने पर भी मंत्रणा में नहीं रखना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

ज्ञानी और छलकपट से मुक्त, एवं शुद्ध मन वाले व्यक्ति को ही मंत्री बनाने में समझदारी है।
– चाणक्य अनमोल विचार

सभी कार्य पूर्व विचार विर्मश से करने चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

लापरवाही अथवा आलस्य से भेद खुल जाता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

निर्बल राजा को तत्काल संधि करनी चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

सभी मार्गों से अर्जित धन की रक्षा करनी चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

राजा, गुप्तचर और मंत्री तीनो का एक मत होना किसी भी लक्ष्य की सफलता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

आलसी राजा प्राप्त वास्तु की रक्षा करने में असमर्थ होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

आलसी राजा अपने विवेक की रक्षा नहीं कर सकता।
– चाणक्य अनमोल विचार

राज्य को नीतिशास्त्र के अनुसार चलना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

आलसी राजा की प्रशंसा उसके सेवक भी नहीं करते।
– चाणक्य अनमोल विचार

शक्तिशाली राजा लाभ को प्राप्त करने का प्रयत्न करता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

राज्यतंत्र को ही नीतिशास्त्र कहते है।
– चाणक्य अनमोल विचार

राज्यतंत्र से सम्बन्धि घरेलु और बाहरी दोनों कर्तव्यों को राजतंत्र का अंग कहा जाता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

राज्य नीति का सम्बन्ध केवल अपने राज्य को समृद्धि प्रदान करने वाले मार्गों से होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

हमेशा शत्रुओं के प्रयत्नों की समीक्षा करते रहना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

शक्तिहीन को बलवान का आश्रय लेना चाहिए, दुर्बल के आश्रय से दुःख ही होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

निर्बल राजा की आज्ञा की भी अवहेलना कदापि नहीं करनी चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

दण्डनीति के उचित प्रयोग से ही प्रजा की रक्षा संभव है।
– चाणक्य अनमोल विचार

अग्नि के समान तेजस्वी जानकर ही किसी का सहारा लेना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

राजा के प्रतिकूल आचरण नहीं करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

अकसर निकट के राज्य स्वभाव से शत्रु हो जाते है।
– चाणक्य अनमोल विचार

किसी विशेष प्रयोजन को पूरा करने के लिए ही शत्रु मित्र बनता है। वक्त आने पर वह बदला ले लेता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

बलवान से युद्ध करना यानिकि हाथियों से पैदल सेना को लड़ाने के समान है।
– चाणक्य अनमोल विचार

कच्चा पात्र कच्चे पात्र से टकराकर टूट जाता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

शत्रु से संधि और एकता होने पर भी सतर्क रहना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

दुर्बल के साथ संधि करे।
– चाणक्य अनमोल विचार

पूर्वाग्रह से ग्रसित दंड देना लोकनिंदा का कारण बनता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

अग्नि में दुर्बलता नहीं होती। अग्नि चिंगारी भी प्रज्जलित होती है।
– चाणक्य अनमोल विचार

आप से ईर्ष्या करने वाले दो समान व्यक्तियों में आपस में विरोध पैदा कर देना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

शराबी नशा और जुए में लिप्त रहने वाले के कार्य कभी पूरे नहीं होते है।
– चाणक्य अनमोल विचार

धन का लालची व्यक्ति श्रीविहीन हो जाता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

मेहनत, उपाय से सभी कार्य पूर्ण हो जाते है। कोई कार्य कठिन नहीं होता।
– चाणक्य अनमोल विचार

दण्डनीति के प्रभावी होने से मंत्रीगण भी बेलगाम होकर अप्रभावी हो जाते है।
– चाणक्य अनमोल विचार

दंड का भय होने से लोग अनर्थ कार्य करने लगते है।
– चाणक्य अनमोल विचार

स्वभाव का मूल अर्थ लाभ होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

दण्डनीति से आत्मरक्षा की जा सकती है, आत्मरक्षा से सबकी रक्षा होती है।
– चाणक्य अनमोल विचार

कार्य करने वाले के लिए उपाय सहायक होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

दंड का निर्धारण विवेक सम्मत होना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

दंडनीति से राजा की प्रवति अर्थात स्वभाव का पता चलता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

अर्थ कार्य का आधार है।
– चाणक्य अनमोल विचार

बिना उपाय के किए गए कार्य प्रयत्न करने पर भी बचाए नहीं जा सकते अर्थात वो नष्ट हो जाते है।
– चाणक्य अनमोल विचार

कार्य का स्वरुप निर्धारित हो जाने के बाद वह कार्य लक्ष्य बन जाता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

अस्थिर मन वाले व्यक्ति की सोच स्थिर नहीं सकती।
– चाणक्य अनमोल विचार

बिना सोच विचार कार्ये करने वालो को भाग्यलक्ष्मी त्याग देती है।
– चाणक्य अनमोल विचार

भाग्य का शमन शांति से करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

जिन्हें खुद के भाग्य पर विश्वास नहीं होता, उनके कार्य पुरे नहीं होते।
– चाणक्य अनमोल विचार

कार्य के मध्य में अति विलम्ब और आलस्य उचित नहीं होता।
– चाणक्य अनमोल विचार

कार्यसिद्धि के लिए हस्तकौशल का उपयोग होना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

अगसर भाग्य के विपरीत होने पर अच्छा कर्म भी दुखदायी हो जाता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

अशुभ कार्यों को नहीं करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

समय का ज्ञान रखने वाले राजा का कर्म समय के द्वारा ही नष्ट हो जाता है। अर्थात समय का ज्ञान मूल्य समझना जरूरी है।
– चाणक्य अनमोल विचार

सभी प्रकार की सम्पति का सभी उपायों से जुटाना करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

ज्ञानियों के कार्य भी भाग्य तथा मनुष्यों के दोष से दूषित हो जाते है।
– चाणक्य अनमोल विचार

न्याय विपरीत पाया गया धन, धन नहीं है, वह अन्याय से कमाया गया है।
– चाणक्य अनमोल विचार

नीचछल कपटी व्यक्ति के सम्मुख अपने रहस्य और अपने दिल की बात नहीं करनी चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

व्यक्ति को चरित्र का उल्लंघन कदापि नहीं करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

मूर्ख लोग कार्यों के मध्य कठिनाई उत्पन्न होने पर दोष ही निकाला करते है।
– चाणक्य अनमोल विचार

सिद्ध प्राप्त कार्यों का बखानप्रकाशन करना ही उचित होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

ज्ञान अर्थात अपने अनुभव और अनुमान के द्वारा कार्य की परीक्षा करते रहना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

उपायों को जानने वाला व्यक्ति, कठिन कार्यों को भी सरल बना लेता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

अज्ञानी व्यक्ति के कार्य को बहुत अधिक महत्तव नहीं देना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

मनुष्य के कार्ये में आई विपति को कुशलता निपुर्णता से ठीक करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

कार्य की सिद्धि के लिए उदारता नहीं बरतनी चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

प्रयत्न नहीं करने से कार्य में विघ्न पड़ता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

परीक्षा किये बिना कार्य करने से कार्य विपत्ति में पड़ जाता है। अर्थात परीक्षा करके विपत्ति को दूर करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

जो अपने कर्तव्यों से बचते है, वे अपने आश्रितों परिजनों का भरणपोषण नहीं कर पाते।
– चाणक्य अनमोल विचार

प्रत्यक्ष और परोक्ष साधनों के अनुमान से कार्य की परीक्षा करें।
– चाणक्य अनमोल विचार

बिना विचार करे कार्ये करने वाले व्यक्ति को लक्ष्मी त्याग देती है।
– चाणक्य अनमोल विचार

जो अपने कर्म को नहीं पहचानता, वह अँधें के समान है।
– चाणक्य अनमोल विचार

अपनी सामर्थशक्ति को जानकार ही कार्य करें।
– चाणक्य अनमोल विचार

दूसरे के धन पर भेदभाव रखना स्वार्थ है।
– चाणक्य अनमोल विचार

धर्मार्थ विरोधी कार्य करने वाला अशांति ही उत्पन्न करता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

ज्यादा कोमल स्वभाव वाला व्यक्ति अपने आश्रितों से भी अपमानित होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

सभा के मध्य जो दूसरों के व्यक्तिगत दोष दिखाता है, वह स्वयं अपने दोष दिखाता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

मुर्ख लोगों का क्रोध उन्हीं का नाश करता है। अर्थात क्रोध खुद का नाश करता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

कठोर दंड से सभी लोग घृणा करते है, अर्थात दोषी को उचित दंड देना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

दान ही धर्म है और न्याय ही धन है।
– चाणक्य अनमोल विचार

अज्ञानी लोगों द्वारा प्रचारित बातों पर चलने से जीवन व्यर्थ हो जाता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

महात्मा को पराए बल पर साहस नहीं करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

सच्चे, सीधे और सरल व्तक्ति दुर्लभता से मिलते है।
– चाणक्य अनमोल विचार

मर्यादाओं का उल्लंघन करने वाले का कभी विश्वास नहीं करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

बहुत से गुणों को एक ही दोष ग्रस्त कर लेता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

आत्मविश्वास की रक्षा प्राण से भी अधिक करनी चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

साधारण दोष देखकर महान गुणों को धूर्तता नहीं समझना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

रत्न कभी खंडित नहीं होता। अर्थात विद्वान व्यक्ति में कोई साधारण दोष होने पर उस पर ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

हमेशा बच्चों की सार्थक बातें ग्रहण करनी चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

सज्जन की राय का उल्लंघन नहीं करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

गुणी व्यक्ति का आश्रय लेने पर निर्गुणी भी गुणी हो जाता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

शत्रु भी उत्साही व्यक्ति के वश में हो जाता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

मृतिका पिंड, मिट्टी का ढेला भी फूलों की सुगंध देता है। अर्थात सत्संग का प्रभाव मनुष्य पर अवश्य पड़ता है, जैसे जिस मिटटी में फूल खिलते है उस मिट्टी से भी फूलों की सुगंध आने लगती है।
– चाणक्य अनमोल विचार

अविश्वसनीय लोगों पर विश्वास नहीं करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

शत्रु का पुत्र अगर मित्र है तो उसकी रक्षा करनी चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

मुर्ख व्यक्ति उपकार करने वाले का भी अपकार करता है। इसके विपरीत जो इसके विरुद्ध आचरण करता है, वह विद्वान कहलाता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

उत्साहहीन व्यक्ति का भाग्य भी अंधकारमय होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

पाप कर्म करने वाले व्यक्ति को क्रोध और भय की चिंता नहीं होती।
– चाणक्य अनमोल विचार

विष प्रत्येक स्तिथि में विष ही रहता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

कार्य करते समय शत्रु का साथ नहीं करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

अकसर विकृति प्रिय लोग ओरों के साथ नीचता का व्यवहार करते है।
– चाणक्य अनमोल विचार

हाथ में आए शत्रु पर कभी विश्वास करें।
– चाणक्य अनमोल विचार

सम्बन्धों का आधार उद्देश्य की पूर्ति के लिए होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

शत्रु के नाजुक, दुर्बलता पर ही प्रहार करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

अपनी कमजोरी लोगों को मत बताईये, अन्यथा लोग उपहास उडायेगें।
– चाणक्य अनमोल विचार

नीच व्यक्ति को उपदेश देना ठीक नहीं होता।
– चाणक्य अनमोल विचार

स्वजनों की बुरी आदतों का समाधान करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

सदाचार से ही शत्रु पर विजय प्राप्त की जा सकती है।
– चाणक्य अनमोल विचार

शत्रु , ऋण और रोग को समाप्त कर देना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

एक ही देश के दो शत्रु परस्पर मित्र हो सकते हैं।
– चाणक्य अनमोल विचार

कल की हज़ार कौड़ियों से आज की एक कौड़ी भली। अर्थात संतोष ही सबसे बड़ा धन है।
– चाणक्य अनमोल विचार

शेर भूखा होने पर भी घास नहीं खाता।
– चाणक्य अनमोल विचार

सबसे बड़ा सफलता का गुरु मन्त्र है, कभी भी अपने राज़ दूसरों को मत बताएं, ये आपको बर्वाद कर सकते हैं।
– चाणक्य अनमोल विचार

मित्रों के संग्रह से बल की प्राप्ति होती है।
– चाणक्य अनमोल विचार

जिस तरह वन में लगी अग्नि चन्दन की लकड़ी को भी जला देती है, अर्थात दुष्ट व्यक्ति किसी का भी अहित कर सकते हैं।
– चाणक्य अनमोल विचार

शत्रु की कमजोरी जानने तक उसे अपना मित्र बनाए रखें।
– चाणक्य अनमोल विचार

संकट में बुद्धिविवेक ही काम आती है।
– चाणक्य अनमोल विचार

आपातकाल स्थिति में स्नेह करने वाला ही मित्र होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

एक बिगड़ैल गाय सैकड़ों कुत्तों से ज्यादा श्रेष्ठ है। अर्थात एक विपरीत स्वभाव
का परम हितैषी व्यक्ति, उन सैकड़ों लोगों से श्रेष्ठ है, जो आपकी चापलूसी करते
हैं।
– चाणक्य अनमोल विचार

जिसके पास धैय नहीं है, उसका वर्तमान है ना ही भविष्य।
– चाणक्य अनमोल विचार

यदि माता दुष्ट प्रवृति की है, तो उसे भी त्याग देना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

यदि स्वयं के हाथ में विष फ़ैल रहा हो तो, उसे काट देना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

सांप को दूध पिलाने पर विष ही बढ़ता है, कि अमृत।
– चाणक्य अनमोल विचार

लोहे को लोहे से ही काटना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

भूख के समान दूसरा कोई शत्रु नहीं है।
– चाणक्य अनमोल विचार

विद्या ही निर्धन के लिए धन है।
– चाणक्य अनमोल विचार

विद्या को तुम से कोई भी नहीं चुरा सकता।
– चाणक्य अनमोल विचार

हर प्रकार के भय से बदनामी का भय सबसे बड़ा होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

आलसी का वर्तमान होता है, और नही भविष्य।
– चाणक्य अनमोल विचार

किसी लक्ष्य की सिद्धि में कभी भी शत्रु का साथ दें।
– चाणक्य अनमोल विचार

सोने धातु के साथ मिलकर चांदी भी सोने जैसी चमक दिखाई पड़ती है अर्थात सत्संग का प्रभाव मनुष्य पर अवश्य पड़ता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

हमेशा ढेकुली नीचे सिर झुकाकर ही कुँए से जल निकालती है। अर्थात कपटी या पापी व्यक्ति हमेशा मधुर वचन बोलकर अपना काम निकालते है।
– चाणक्य अनमोल विचार

कल के मोर से आज का कबूतर भला। अर्थात संतोष सब बड़ा धन है।
– चाणक्य अनमोल विचार

अग्नि सिर में स्थापित करने पर भी जलाती है। अर्थात दुष्ट व्यक्ति का कितना भी सम्मान कर लें, वह सदैव दुःख ही देता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

अन्न के बढ़कर और कोई दूसरा धन नहीं है।
– चाणक्य अनमोल विचार

जो व्यक्ति जिस कार्ये में कुशल हो, उसे उसी कार्ये में लगना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

समय का ध्यान नहीं रखने वाला व्यक्ति अपने जीवन में सफल नहीं हो सकता।
– चाणक्य अनमोल विचार

चंचल चित वाले व्यक्ति के कार्य कभी समाप्त नहीं होते।
– चाणक्य अनमोल विचार

अर्थ, धर्म और कर्म जीवन का आधार है।
– चाणक्य अनमोल विचार

शत्रु दण्डनीति के ही योग्य होना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

व्यसनी दुराचारी व्यक्ति कभी सफल नहीं हो सकता।
– चाणक्य अनमोल विचार

सदैव भाग्य पुरुषार्थी के पीछे चलता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

अपने से अधिक बलशाली और समान बल वाले से शत्रुता नहीं रखें।
– चाणक्य अनमोल विचार

प्रबल शत्रु को कमजोर समझकर दृढ साहस और जोश के साथ उस पर आक्रमण करे।
– चाणक्य अनमोल विचार

जिसकी आत्मा संयमित होती है, वही आत्म विजयी होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

सदैव अपने स्थान पर बने रहने से ही मनुष्य पूजा जाता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

मंत्रणा को गुप्त रखने से ही कार्य सिद्ध होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

धूर्त व्यक्ति अपने स्वार्थ मात्र के लिए दूसरों की सेवा करते हैं।
– चाणक्य अनमोल विचार

जो व्यक्ति वर्तमान में समय का मूल्य नहीं समझता, भविष्य में उस व्यक्ति का कोई मूल्य नहीं।
– चाणक्य अनमोल विचार

शत्रु के गुणों को भी ग्रहण कर लेना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

सत्य भी यदि अनुचित लगता है, तो उसे नहीं कहना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

आग में और आग नहीं डालनी चाहिए। अर्थात क्रोधी व्यक्ति को अधिक क्रोध नहीं दिलाना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

दुष्ट की मित्रता से शत्रु की मित्रता अच्छी होती है।
– चाणक्य अनमोल विचार

कठिन समय के लिए धन जमा करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

कल का कार्य आज ही कर ले।
– चाणक्य अनमोल विचार

मनुष्य की मुख वाणी ही विष और अमृत की खान है।
– चाणक्य अनमोल विचार

दुष्ट स्त्री बुद्धिमान व्यक्ति के शरीर को भी निर्बल बना सकती है।
– चाणक्य अनमोल विचार

वृद्धजनों की सेवा ही विनय का आधार है।
– चाणक्य अनमोल विचार

प्रकृति, सहज रूप से प्रजा के संपन्न होने से नेताविहीन राज्य भी संचालित होता रहता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

सुख का आधार धर्म होता है, धर्म का आधार अर्थ अर्थात धन है, अर्थ का आधार राज्य है, और राज्य का आधार अपनी इन्द्रियों पर विजय पाना है।
– चाणक्य अनमोल विचार

जहां लक्ष्मी रूप धन का निवास होता है, वहां सहज ही सुख.सम्पदा जुड़ती है।
– चाणक्य अनमोल विचार

ज्ञान से राजा अपनी आत्मा का परिष्कार और सम्पादन करता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

दोषहीन कार्यों का होना हमेशा दुर्लभ होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

हर विचार को सकारात्मक और नकारात्मक दोनो तरह से सोचना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

इन्द्रियों पर विजय का आधार विनम्रता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

प्रकर्ति का कोप सभी कोपों से बड़ा होता है। अर्थात प्रकृति ही नाशक है।
– चाणक्य अनमोल विचार

स्वाभिमानी व्यक्ति प्रतिकूल विचारों को सम्मुख रखकर, दुबारा उन पर विचार करता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

ज्ञानी और छलकपट से मुक्त, एवं शुद्ध मन वाले व्यक्ति को ही मंत्री बनाने में समझदारी है।
– चाणक्य अनमोल विचार

धन की गोपनीयता को सर्वोत्तम माना जाना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

खास विचार अथवा गुप्त मंत्रणा को गुप्त रखने पर कार्य नष्ट हो जाता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

सभी कार्य पूर्व विचार विर्मश से करने चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

अविनीत व्यक्ति को स्नेही होने पर भी मंत्रणा में नहीं रखना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

लापरवाही अथवा आलस्य से भेद खुल जाता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

योग्य सहायकों के बिना निर्णय करना बड़ा कठिन होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

शासक को स्वयं योग्य बनकर योग्य प्रशासकों की सहायता से शासन करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

किसी भी कार्य में पल भर भी विलम्ब करें।
– चाणक्य अनमोल विचार

आत्म विजयी लोग सभी प्रकार की संपत्ति एकत्र करने में समर्थ होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

आलसी राजा प्राप्त वास्तु की रक्षा करने में असमर्थ होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

आलसी राजा की प्रशंसा उसके सेवक भी नहीं करते।
– चाणक्य अनमोल विचार

राज्यतंत्र को ही नीतिशास्त्र कहते है।
– चाणक्य अनमोल विचार

राज्य नीति का सम्बन्ध केवल अपने राज्य को समृद्धि प्रदान करने वाले मार्गों से होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

शक्तिशाली राजा लाभ को प्राप्त करने का प्रयत्न करता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

किसी विशेष प्रयोजन को पूरा करने के लिए ही शत्रु मित्र बनता है। वक्त आने पर वह बदला ले लेता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

राज्य को नीतिशास्त्र के अनुसार चलना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

कच्चा पात्र कच्चे पात्र से टकराकर टूट जाता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

अकसर निकट के राज्य स्वभाव से शत्रु हो जाते है।
– चाणक्य अनमोल विचार

दुर्बल के साथ संधि करे।
– चाणक्य अनमोल विचार

आलसी राजा अपने विवेक की रक्षा नहीं कर सकता।
– चाणक्य अनमोल विचार

निर्बल राजा को तत्काल संधि करनी चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

राज्यतंत्र से सम्बन्धि घरेलु और बाहरी दोनों कर्तव्यों को राजतंत्र का अंग कहा जाता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

शत्रु से संधि और एकता होने पर भी सतर्क रहना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

वृद्ध सेवा अर्थात ज्ञानियों की सेवा से ही ज्ञान प्राप्त होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

अग्नि के समान तेजस्वी जानकर ही किसी का सहारा लेना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

शराबी नशा और जुए में लिप्त रहने वाले के कार्य कभी पूरे नहीं होते है।
– चाणक्य अनमोल विचार

अग्नि में दुर्बलता नहीं होती। अग्नि चिंगारी भी प्रज्जलित होती है।
– चाणक्य अनमोल विचार

धन का लालची व्यक्ति श्रीविहीन हो जाता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

दण्डनीति के प्रभावी होने से मंत्रीगण भी बेलगाम होकर अप्रभावी हो जाते है।
– चाणक्य अनमोल विचार

आप से ईर्ष्या करने वाले दो समान व्यक्तियों में आपस में विरोध पैदा कर देना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

दंड का भय होने से लोग अनर्थ कार्य करने लगते है।
– चाणक्य अनमोल विचार

पूर्वाग्रह से ग्रसित दंड देना लोकनिंदा का कारण बनता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

दण्डनीति के उचित प्रयोग से ही प्रजा की रक्षा संभव है।
– चाणक्य अनमोल विचार

राजा के प्रतिकूल आचरण नहीं करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

हमेशा शत्रुओं के प्रयत्नों की समीक्षा करते रहना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

दण्डनीति से आत्मरक्षा की जा सकती है, आत्मरक्षा से सबकी रक्षा होती है।
– चाणक्य अनमोल विचार

निर्बल राजा की आज्ञा की भी अवहेलना कदापि नहीं करनी चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

बलवान से युद्ध करना यानिकि हाथियों से पैदल सेना को लड़ाने के समान है।
– चाणक्य अनमोल विचार

दंड का निर्धारण विवेक सम्मत होना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

शक्तिहीन को बलवान का आश्रय लेना चाहिए, दुर्बल के आश्रय से दुःख ही होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

बिना उपाय के किए गए कार्य प्रयत्न करने पर भी बचाए नहीं जा सकते अर्थात वो नष्ट हो जाते है।
– चाणक्य अनमोल विचार

मेहनत, उपाय से सभी कार्य पूर्ण हो जाते है। कोई कार्य कठिन नहीं होता।
– चाणक्य अनमोल विचार

अर्थ कार्य का आधार है।
– चाणक्य अनमोल विचार

कार्य का स्वरुप निर्धारित हो जाने के बाद वह कार्य लक्ष्य बन जाता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

अस्थिर मन वाले व्यक्ति की सोच स्थिर नहीं सकती।
– चाणक्य अनमोल विचार

कार्य करने वाले के लिए उपाय सहायक होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

कार्य के मध्य में अति विलम्ब और आलस्य उचित नहीं होता।
– चाणक्य अनमोल विचार

कार्यसिद्धि के लिए हस्तकौशल का उपयोग होना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

समय का ज्ञान रखने वाले राजा का कर्म समय के द्वारा ही नष्ट हो जाता है। अर्थात समय का ज्ञान मूल्य समझना जरूरी है।
– चाणक्य अनमोल विचार

अशुभ कार्यों को नहीं करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

बिना सोच विचार कार्ये करने वालो को भाग्यलक्ष्मी त्याग देती है।
– चाणक्य अनमोल विचार

अगसर भाग्य के विपरीत होने पर अच्छा कर्म भी दुखदायी हो जाता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

ज्ञान अर्थात अपने अनुभव और अनुमान के द्वारा कार्य की परीक्षा करते रहना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

स्वभाव का मूल अर्थ लाभ होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

उपायों को जानने वाला व्यक्ति, कठिन कार्यों को भी सरल बना लेता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

अज्ञानी व्यक्ति के कार्य को बहुत अधिक महत्तव नहीं देना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

सभी प्रकार की सम्पति का सभी उपायों से जुटाना करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

दंडनीति से राजा की प्रवति अर्थात स्वभाव का पता चलता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

राजा, गुप्तचर और मंत्री तीनो का एक मत होना किसी भी लक्ष्य की सफलता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

सभी मार्गों से अर्जित धन की रक्षा करनी चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

सिद्ध प्राप्त कार्यों का बखानप्रकाशन करना ही उचित होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

मूर्ख लोग कार्यों के मध्य कठिनाई उत्पन्न होने पर दोष ही निकाला करते है।
– चाणक्य अनमोल विचार

कार्य की सिद्धि के लिए उदारता नहीं बरतनी चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

मनुष्य के कार्ये में आई विपति को कुशलता निपुर्णता से ठीक करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

जिन्हें खुद के भाग्य पर विश्वास नहीं होता, उनके कार्य पुरे नहीं होते।
– चाणक्य अनमोल विचार

योग्य सहायकों के बिना सही निर्णय करना बड़ा कठिन होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

जो अपने कर्तव्यों से बचते है, वे अपने आश्रितों परिजनों का भरणपोषण नहीं कर पाते।
– चाणक्य अनमोल विचार

प्रत्यक्ष और परोक्ष साधनों के अनुमान से कार्य की परीक्षा करें।
– चाणक्य अनमोल विचार

परीक्षा किये बिना कार्य करने से कार्य विपत्ति में पड़ जाता है। अर्थात परीक्षा करके विपत्ति को दूर करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

बिना विचार करे कार्ये करने वाले व्यक्ति को लक्ष्मी त्याग देती है।
– चाणक्य अनमोल विचार

अपनी सामर्थशक्ति को जानकार ही कार्य करें।
– चाणक्य अनमोल विचार

जो अपने कर्म को नहीं पहचानता, वह अँधें के समान है।
– चाणक्य अनमोल विचार

ज्यादा कोमल स्वभाव वाला व्यक्ति अपने आश्रितों से भी अपमानित होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

प्रयत्न नहीं करने से कार्य में विघ्न पड़ता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

सभा के मध्य जो दूसरों के व्यक्तिगत दोष दिखाता है, वह स्वयं अपने दोष दिखाता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

नीचछल कपटी व्यक्ति के सम्मुख अपने रहस्य और अपने दिल की बात नहीं करनी चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

कठोर दंड से सभी लोग घृणा करते है, अर्थात दोषी को उचित दंड देना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

दूसरे के धन पर भेदभाव रखना स्वार्थ है।
– चाणक्य अनमोल विचार

मुर्ख लोगों का क्रोध उन्हीं का नाश करता है। अर्थात क्रोध खुद का नाश करता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

भाग्य का शमन शांति से करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

अज्ञानी लोगों द्वारा प्रचारित बातों पर चलने से जीवन व्यर्थ हो जाता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

सच्चे, सीधे और सरल व्तक्ति दुर्लभता से मिलते है।
– चाणक्य अनमोल विचार

ज्ञानियों के कार्य भी भाग्य तथा मनुष्यों के दोष से दूषित हो जाते है।
– चाणक्य अनमोल विचार

व्यक्ति को चरित्र का उल्लंघन कदापि नहीं करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

महात्मा को पराए बल पर साहस नहीं करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

साधारण दोष देखकर महान गुणों को धूर्तता नहीं समझना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

हमेशा बच्चों की सार्थक बातें ग्रहण करनी चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

दान ही धर्म है और न्याय ही धन है।
– चाणक्य अनमोल विचार

आत्मविश्वास की रक्षा प्राण से भी अधिक करनी चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

मर्यादाओं का उल्लंघन करने वाले का कभी विश्वास नहीं करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

रत्न कभी खंडित नहीं होता। अर्थात विद्वान व्यक्ति में कोई साधारण दोष होने पर उस पर ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

सज्जन की राय का उल्लंघन नहीं करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

मृतिका पिंड, मिट्टी का ढेला भी फूलों की सुगंध देता है। अर्थात सत्संग का प्रभाव मनुष्य पर अवश्य पड़ता है, जैसे जिस मिटटी में फूल खिलते है उस मिट्टी से भी फूलों की सुगंध आने लगती है।
– चाणक्य अनमोल विचार

शत्रु भी उत्साही व्यक्ति के वश में हो जाता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

गुणी व्यक्ति का आश्रय लेने पर निर्गुणी भी गुणी हो जाता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

विष प्रत्येक स्तिथि में विष ही रहता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

उत्साहहीन व्यक्ति का भाग्य भी अंधकारमय होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

अविश्वसनीय लोगों पर विश्वास नहीं करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

शत्रु के नाजुक, दुर्बलता पर ही प्रहार करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

शत्रु का पुत्र अगर मित्र है तो उसकी रक्षा करनी चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

अपनी कमजोरी लोगों को मत बताईये, अन्यथा लोग उपहास उडायेगें।
– चाणक्य अनमोल विचार

स्वजनों की बुरी आदतों का समाधान करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

कार्य करते समय शत्रु का साथ नहीं करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

मुर्ख व्यक्ति उपकार करने वाले का भी अपकार करता है। इसके विपरीत जो इसके विरुद्ध आचरण करता है, वह विद्वान कहलाता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

पाप कर्म करने वाले व्यक्ति को क्रोध और भय की चिंता नहीं होती।
– चाणक्य अनमोल विचार

अकसर विकृति प्रिय लोग ओरों के साथ नीचता का व्यवहार करते है।
– चाणक्य अनमोल विचार

सम्बन्धों का आधार उद्देश्य की पूर्ति के लिए होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

कभी भी पुरुषार्थी का अपमान नहीं करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

बहुत से गुणों को एक ही दोष ग्रस्त कर लेता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

हाथ में आए शत्रु पर कभी विश्वास करें।
– चाणक्य अनमोल विचार

क्षमाशील पुरुष को कभी दुःखी करें, अथार्त क्षमा करने योग्य पुरुष को दुःखी करना पाप के समान है।
– चाणक्य अनमोल विचार

धर्मार्थ विरोधी कार्य करने वाला अशांति ही उत्पन्न करता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

सदाचार से ही शत्रु पर विजय प्राप्त की जा सकती है।
– चाणक्य अनमोल विचार

ज्ञान ही ऐश्वर्य का फल है।
– चाणक्य अनमोल विचार

नीच व्यक्ति को उपदेश देना ठीक नहीं होता।
– चाणक्य अनमोल विचार

मुर्ख व्यक्ति दान देने में दुःख का अनुभव करता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

धैर्यवान व्यक्ति अपने धैर्ये से रोगों को भी जीत लेता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

विवेकहीन व्यक्ति महान ऐश्वर्य पाने के बाद भी नष्ट हो जाते हैं।
– चाणक्य अनमोल विचार

अनुराग अर्थात प्रेम फल परिणाम से ज्ञात होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

कमजोर शरीर में बढ़ने वाले रोग की उपेक्षा करें।
– चाणक्य अनमोल विचार

स्वामी द्वारा एकांत में कहे गए गुप्त रहस्यों को मुर्ख व्यक्ति प्रकट कर देते हैं।
– चाणक्य अनमोल विचार

आवश्यकतानुसार सीमित भोजन करना ही अच्छा स्वास्थ्य प्रदान करता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

पहले मंजिल निश्चय करिएँ, फिर कार्य आरम्भ करें।
– चाणक्य अनमोल विचार

जब कार्यों की अधिकता हो, तब उस कार्य को पहले करें, जिससे अधिक फल प्राप्त होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

कठोर वाणी अग्निदाह से भी अधिक तीव्र दुःखदायक होती है।
– चाणक्य अनमोल विचार

शरीरिक रोग शत्रु से भी बड़ा है।
– चाणक्य अनमोल विचार

अपने तथा अन्य लोगों के बिगड़े कार्यों का स्वयं निरीक्षणपरीक्षण करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

लोभ बुद्धि पर छा जाता है, अर्थात लोभ ही बुद्धि विवेक को नष्ट कर देता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

धूत, कपटी मूर्ख व्यक्तियों में साहस होता ही है। वे अपना साहस चोरी, चकारी, लूट.पाट, हत्या आदि रूप में इस्तेमाल करते हैं।
– चाणक्य अनमोल विचार

मूर्खों से विवाद नहीं करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

धर्म का आधार ही सत्य और दान है, धर्म के द्वारा ही लोक विजय होती है और मृत्यु भी धर्म पर चलने वाले व्यक्ति की रक्षा करती है।
– चाणक्य अनमोल विचार

विनाश का उपस्थित होना सहज प्रकर्ति से ही जाना जा सकता है और अधर्म बुद्धि से आत्मविनाश की सुचना मिलती है।
– चाणक्य अनमोल विचार

लोक व्यवहार में कुशल व्यक्ति ही बुद्धिमान कहलाता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

मुर्ख से मूर्खों जैसी ही भाषा बोलनी चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

धर्म के समान कोई मित्र नहीं है, और दया ही धर्म की जन्मभूमि है।
– चाणक्य अनमोल विचार

मूर्ख का कोई मित्र नहीं है।
– चाणक्य अनमोल विचार

चुगलखोर व्यक्ति के सम्मुख कभी गोपनीय रहस्य खोलें।
– चाणक्य अनमोल विचार

दूसरों की रहस्यमयी, गुप्त बातों को नहीं सुनना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

दरिद्र मनुष्य का जीवन मृत्यु के समान है।
– चाणक्य अनमोल विचार

पराया व्यक्ति यदि हितैषी हो तो वह भाई समान है।
– चाणक्य अनमोल विचार

धनवान व्यक्ति का सारा संसार सम्मान करता है, अर्थात धन का संचय अवश्य करें।
– चाणक्य अनमोल विचार

चालाक और लोभी व्यक्ति बेकार में घनिष्ठता को बढ़ाते है।
– चाणक्य अनमोल विचार

अकुलीन धनिक भी कुलीन से श्रेष्ठ है।
– चाणक्य अनमोल विचार

कर्म करने वाले को मृत्यु का भय नहीं सताता।
– चाणक्य अनमोल विचार

दूसरे के धन का लोभ नाश का कारण होता है, दूसरे का धन किंचिद् भी नहीं चुराना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

दूसरे के धन अथवा वैभव का लालच नहीं करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

नीच व्यक्ति को अपमान का भय नहीं होता।
– चाणक्य अनमोल विचार

सज्जन व्यक्ति से बुरा आचरण नहीं करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

साधू पुरुष किसी के भी धन को अपना ही मानते है। अर्थात धन की मांग नहीं करते।
– चाणक्य अनमोल विचार

हर पल अपने प्रभुत्व को बनाए रखना ही कत्र्तव्य है।
– चाणक्य अनमोल विचार

अकसर दूसरों के धन का अपहरण करने से स्वयं अपने ही धन का नाश हो जाता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

जाने योग्य जगहों पर जाने से यश, पुण्य और आयु क्षीण हो जाते है।
– चाणक्य अनमोल विचार

संपन्न और दयालु स्वामी की ही नौकरी करनी चाहिए, लोभी और कंजूस स्वामी से कुछ पाना जुगनू से आग प्राप्त करने के समान है।
– चाणक्य अनमोल विचार

हमेशा सामर्थ्य के अनुसार ही दान दें।
– चाणक्य अनमोल विचार

मृत व्यक्ति का औषधि से क्या प्रयोजन।
– चाणक्य अनमोल विचार

निकम्मे अथवा आलसी व्यक्ति को भूख और कष्ट झेलना पड़ता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

धनहीन की बुद्धि दिखाई नहीं देती, निर्धन व्यक्ति की हितकारी बातों को भी कोई नहीं सुनता।
– चाणक्य अनमोल विचार

अहंकार से बड़ा मनुष्य का कोई शत्रु नहीं।
– चाणक्य अनमोल विचार

शास्त्रों के ज्ञान से इन्द्रियों को वश में किया जा सकता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

सभा के मध्य शत्रु पर क्रोध करें।
– चाणक्य अनमोल विचार

विद्या से विद्वान की ख्याति होती है, यश शरीर को नष्ट नहीं करता।
– चाणक्य अनमोल विचार

जो दूसरों की भलाई के लिए समर्पित है, वही सच्चा पुरुष कहलाता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

शत्रु की बुरी आदतों को सुनकर कानों को सुख मिलता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

गलत कार्यों में लगने वाले व्यक्तियों को शास्त्रज्ञान ही रोक पाते हैं।
– चाणक्य अनमोल विचार

मलेच्छ अर्थात नीच व्यक्ति की भी यदि कोई अच्छी बात हो तो अपना लेना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

विद्वान और प्रबुद्ध व्यक्ति समाज के रत्न होते हैं।
– चाणक्य अनमोल विचार

जितेन्द्रिय व्यक्ति को विषय वासनाओं का भय नहीं सताता।
– चाणक्य अनमोल विचार

विशेष स्थिति में ही पुरुष सम्मान पाता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

शास्त्रों का ज्ञान आलसी को नहीं हो सकता।
– चाणक्य अनमोल विचार

स्त्री के प्रति हमेशा आसक्त रहने वाले पुरुष को तो स्वर्ग मिलता है और धर्म, और ही कर्म।
– चाणक्य अनमोल विचार

रत्नों की प्राप्ति बहुत कठिन है। अर्थात श्रेष्ठ नर और श्रेष्ठ नारियों की प्राप्ति अत्यन्त दुर्लभ है।
– चाणक्य अनमोल विचार

कार्य के लक्षण ही सफलता. और असफलता के संकेत दे देते है।
– चाणक्य अनमोल विचार

कुशल लोगों को रोजगार का भय नहीं होता।
– चाणक्य अनमोल विचार

गुणवान व्यक्तियों का उपहास नहीं करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

हमेशा कथन के अनुसार ही उत्तर देना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

पात्र के अनुरूप दान दें।
– चाणक्य अनमोल विचार

वैभव के अनुरूप ही आभूषण और वस्त्र धारण करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

विष में यदि अमृत हो तो उसे भी ग्रहण कर लेना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

उम्र के अनुरूप ही वेश धारण करें।
– चाणक्य अनमोल विचार

शिष्य को गुरु के वश में रहकर कार्य करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

कार्य के अनुरूप प्रयत्न करें।
– चाणक्य अनमोल विचार

पुत्र को पिता के अनुकूल आचरण करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

स्नेह करने वालों का रोषगुस्सा अल्प समय के लिए होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

मुर्ख धूर्त व्यक्ति को अपने दोष दिखाई नहीं देते, उसे दूसरे के दोष ही दिखाई देते हैं।
– चाणक्य अनमोल विचार

ऐश्वर्य पैशाचिकता के समान होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

अत्यधिक आदर.सत्कार से शंका उत्पन्न हो जाती है।
– चाणक्य अनमोल विचार

बुरे व्यक्ति पर क्रोध करने से पहले अपने आप पर ही क्रोध करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

बुद्धिमान व्यक्ति को मुर्ख, मित्र, गुरु और अपने प्रियजनों से वाद विवाद नहीं करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

शांत व्यक्ति सबको अपना बना लेता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

अपने कुल अर्थात वंश के अनुसार ही व्यवहार करें।
– चाणक्य अनमोल विचार

बिना प्रयत्न किए धन प्राप्ति की इच्छा करना बालू में से तेल निकालने के समान है।
– चाणक्य अनमोल विचार

 “जो व्यक्ति जिस कार्य में कुशल और मन से तीव्र इच्छा हो, उसे उसी कार्य में लगाना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

स्त्री का आभूषण लज्जा है, ब्राह्मणों का आभूषण वेद है, सभी व्यक्तियों का आभूषण धर्म है, और विनय से युक्त विद्या सभी आभूषणों की आभूषण है।
– चाणक्य अनमोल विचार

राजदासी से कभी शारीरिक सम्बन्ध नहीं बनाने चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

प्रत्येक अवस्था में सर्वप्रथम माता का भरण पोषण करना चाहिए। अर्थात माता सर्वश्रेष्ठ है।
– चाणक्य अनमोल विचार

शांतिपूर्ण देश में ही रहें, जहां सज्जन रहते हों, वहीं बसें।
– चाणक्य अनमोल विचार

पुत्र के गुणवान होने से परिवार स्वर्ग बन जाता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

राजधन की ओर आँख उठाकर भी नहीं देखना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

एक ही गुरुकुल में पढ़ने वाले छात्रछात्राओं का ज्यादा निकट संपर्क ब्रह्मचर्य को नष्ट कर सकता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

विनाश काल आने पर दवा की बात कोई नहीं सुनता।
– चाणक्य अनमोल विचार

गुणी पुत्र मातापिता की दुर्गति नहीं होने देता।
– चाणक्य अनमोल विचार

देहधारी व्यक्ति को सुखदुःख की कोई कमी नहीं रहती।
– चाणक्य अनमोल विचार

सेवक को स्वामी के अनुकूल काम करने चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

सज्जन तिल बराबर उपकार को भी पर्वत के समान बड़ा मानकर चलता है, अर्थात सज्जनों का उपकार करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

पुत्र को सभी विद्याओं में क्रियाशीलनिपुर्ण बनाना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

दुष्ट व्यक्ति पर उपकार नहीं करना चाहिए, उपकार का बदला चुकाने के भय से दुष्ट व्यक्ति शत्रु बन जाता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

पराए खेत में बीज डाले, अर्थात पराई स्त्री से सम्भोग करें।
– चाणक्य अनमोल विचार

वेदों से बाहर कोई धर्म नहीं है।
– चाणक्य अनमोल विचार

आंखों के समान कोई ज्योति नहीं, और आँखों के बिना शरीर क्या है।
– चाणक्य अनमोल विचार

जैसा शरीर होता है वैसा ही ज्ञान होता है, जैसी बुद्धि होती है, वैसा ही वैभव होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

स्त्री के बंधन से मोक्ष पाना अति दुर्लभ है, सभी अशुभों का क्षेत्र स्त्री है।
– चाणक्य अनमोल विचार

सत वाणी से स्वर्ग प्राप्त होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

धर्म का विरोध कभी करें।
– चाणक्य अनमोल विचार

सत्य से बढ़कर कोई तप नहीं, और सत्य से स्वर्ग की प्राप्ति होती है।
– चाणक्य अनमोल विचार

दूसरों के गुणों से ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

यदि खाने योग्य भोजन से पेट में बदहजमी समस्या हो जाए तो, ऐसा भोजन कभी नहीं करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

दुष्ट व्यक्ति का कोई मित्र नहीं होता।
– चाणक्य अनमोल विचार

सदाचार व्यवहार से मनुष्य का यश और आयु दोनों बढ़ती है।
– चाणक्य अनमोल विचार

दानवीर ही सबसे बड़ा वीर है।
– चाणक्य अनमोल विचार

याचकों का अपमान अथवा उपेक्षा नहीं करनी चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

जो कुलीन होकर भी विनीत है, वह श्रेष्ठ कुलीनों से भी बढ़कर होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

पुरुष के लिए कल्याण का मार्ग अपनाना ही उसके लिए जीवन शक्ति रूप है।
– चाणक्य अनमोल विचार

दुर्जन व्यक्ति के साथ अपने भाग्य को नहीं जोड़ना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

अपने व्यवसाय में सफल नीच व्यक्ति को भी साझीदार नहीं बनाना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

कठिन कार्य करवा लेने के उपरान्त भी नीच व्यक्ति कार्य करने वाले का अपमान ही करता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

झूठे अथवा दुर्वचन शब्द लम्बे समय तक स्मरण रहते है। अर्थात हमेशा सत्य बोलें।
– चाणक्य अनमोल विचार

किये गये कृतघ्न अर्थात उपकार मानने वाले व्यक्ति को नरक ही प्राप्त होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

विनय ही सबका आभूषण है।
– चाणक्य अनमोल विचार

गुणवान व्यक्ति क्षुद्रता को त्याग देता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

जल में मूत्र त्याग करें, और नग्न होकर जल में प्रवेश करें।
– चाणक्य अनमोल विचार

जो मांगता है, उसका कोई गौरव नहीं होता।
– चाणक्य अनमोल विचार

सत्य विश्वास पर संसार टिका हुआ है।
– चाणक्य अनमोल विचार

उन्नति और अवनति हमेशा वाणी के अधीन होते हैं।
– चाणक्य अनमोल विचार

प्रिय और संगत वचन बोलने वाले का कोई शत्रु नहीं होता।
– चाणक्य अनमोल विचार

मनुष्य स्वयं ही दुःखों को बुलाता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

जिन वचनो से हितोषी राजा के प्रति द्वेष उत्पन्न होता हो, ऐसे वाणी नहीं बोलने चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

जुगनू कितना भी चमकीला हो, परन्तु उससे आग का काम नहीं लिया जा सकता।
– चाणक्य अनमोल विचार

बहुत पुराना नीम का पेड़ होने पर भी उससे सरौता नहीं बन सकता।
– चाणक्य अनमोल विचार

बिना प्रयत्न के जहां जल उपलब्ध हो, वही कृषि करनी चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

जो सुख मिला है, उसे छोड़े।
– चाणक्य अनमोल विचार

शास्त्रों के जानने पर श्रेष्ठ पुरुषों के आचरणों के अनुसार आचरण करें।
– चाणक्य अनमोल विचार

जैसी शिक्षा, वैसी बुद्धि।
– चाणक्य अनमोल विचार

गुरुओं की आलोचना नहीं करें।
– चाणक्य अनमोल विचार

सौभाग्य ही स्त्री का आभूषण है।
– चाणक्य अनमोल विचार

शत्रु की जीविका भी नष्ट नहीं करनी चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

समृद्धता से कोई गुणवान नहीं हो जाता।
– चाणक्य अनमोल विचार

जैसा बीज होता है, वैसा ही फल होता है, अर्थात अच्छे कर्म करने पर अच्छे फल की आशा की जा सकती है।
– चाणक्य अनमोल विचार

जैसा कुल, वैसा आचरण।
– चाणक्य अनमोल विचार

समस्त दुखों को नष्ट करने की औषधि मोक्ष है, मोक्ष सत्य, निष्कपट, त्याग, सदाचार, सत्संग और उत्तम विचारों का अनुसरण करने से प्राप्त होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

शास्त्र शिष्टाचार से बड़ा नहीं है।
– चाणक्य अनमोल विचार

अकारण किसी के घर में प्रवेश करें।
– चाणक्य अनमोल विचार

स्त्री का नाम सभी अशुभ घटनाओं से जुड़ा हुआ है।
– चाणक्य अनमोल विचार

तीन वेदों ऋग, यर्जु साम को जानने वाला व्यक्ति ही यज्ञ के फल को जानता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

विवाद के समय धर्म के अनुसार कार्य करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

किसी कार्य आरम्भ करने से पहले विद्वान और अनुभवी लोगों से पूछना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

विनाशकाल आने पर व्यक्ति अनीति करने लगता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

स्त्री के बंधन से छूटना अथवा मोक्ष पाना अत्यंत कठिन है।
– चाणक्य अनमोल विचार

दुर्वचनों से कुल का नाश हो जाता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

दुर्जन व्यक्तियों द्वारा संगृहीत सम्पति का उपभोग दुर्जन ही करते है।
– चाणक्य अनमोल विचार

प्रातःकाल उठकर ही दिन भर के कार्यों के बारें में विचार समीक्षा कर लेनी चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

जिसके द्वारा जीवनयापन होता है, उसकी निंदा नहीं करनी चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

हंस पक्षी श्मशान में नहीं रहता। अर्थात ज्ञानी व्यक्ति भी मुर्ख और दुष्ट व्यक्तियों के पास बैठना पसंद नहीं करते।
– चाणक्य अनमोल विचार

जिस प्रकार बालू अपने रूखे स्वभाव नहीं छोड़ सकता, उसी प्रकार दुष्ट व्यक्ति भी अपना स्वभाव नहीं छोड़ पाता।
– चाणक्य अनमोल विचार

पराई वस्तु को पाने की लालसा नहीं रखनी चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

दान जैसा कोई वशीकरण मन्त्र नहीं है।
– चाणक्य अनमोल विचार

इन्द्रियों को वश में करना ही तप का सार है।
– चाणक्य अनमोल विचार

समस्त संसार धन के पीछे लगा है। धन केवल जरूरतों के अनुसार एकत्र करना चाहिए, अन्यथा अधिक धन विपरीत स्थिति में विनाशकारी हो सकता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

निर्धन होकर जीने से तो मर जाना अच्छा है।
– चाणक्य अनमोल विचार

दिन में स्वप्न नहीं देखने चाहिए, दिन में सोने से आयु कम होती है।
– चाणक्य अनमोल विचार

आत्मस्तुति अर्थात व्यक्ति को अपनी प्रशंसा अपने ही मुख से नहीं करनी चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

शुद्ध किया हुआ नीम भी आम नहीं बन सकता, अर्थात कडुवे वचन दोबारा वापस नहीं आते।
– चाणक्य अनमोल विचार

लोक व्यवहार शास्त्रों के अनुकूल होना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

पराए धन को छीनना अपराध है।
– चाणक्य अनमोल विचार

सज्जन दुर्जनों में विचरण नही करते।
– चाणक्य अनमोल विचार

आशा लज्जा को दूर कर देती है अर्थात मनुष्य को निर्लज्ज बना देती है।
– चाणक्य अनमोल विचार

लोभ द्वारा शत्रु को भी भ्रष्ट किया जा सकता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

बुद्धिहीन व्यक्ति निकृष्ट साहित्य के प्रति मोहित होते है।
– चाणक्य अनमोल विचार

श्रेष्ठ व्यक्ति अपने समान ही दूसरों को समझता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

जहां सुख शांति से रहा जा सके, वही स्थान श्रेष्ठ है।
– चाणक्य अनमोल विचार

श्रेष्ठ और सुहृदय व्यक्ति अपने आश्रित के दुःख को अपना ही दुःख समझते है।
– चाणक्य अनमोल विचार

नीच घृत व्यक्ति ह्र्दयगत बात को छिपाकर कुछ और ही बात कहता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

रूप के अनुसार ही गुण होते है।
– चाणक्य अनमोल विचार

सेवकों को अपने स्वामी का गुणगान करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

नीच लोगों की कृपा पर निर्भर होना व्यर्थ है।
– चाणक्य अनमोल विचार

दिया गया दान कभी नष्ट नहीं होता।
– चाणक्य अनमोल विचार

राजा की आज्ञा का कभी उल्लंघन करे, अपनी सेवाओं से स्वामी की कृपा पाना सेवकों का धर्म है।
– चाणक्य अनमोल विचार

बुद्धिमानों के शत्रु नहीं होते।
– चाणक्य अनमोल विचार

धर्म को व्यावहारिक होना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

बल प्रयोग के स्थान पर क्षमा दान करना अधिक प्रशंसनीय होता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

समस्त तत्त्वों का ज्ञान ही शास्त्र का प्रयोजन है, और कर्म करने से ही तत्त्वज्ञान को समझा जा सकता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

व्यक्ति के मन में क्या है, यह उसके व्यवहार से प्रकट हो जाता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

लोक चरित्र को समझना सर्वज्ञता कहलाती है।
– चाणक्य अनमोल विचार

झूठी गवाही देने वाला नरक जाने के समान है, “
– चाणक्य अनमोल विचार

चोर और राज कर्मचारियों से धन की रक्षा करनी चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

धन के नशे में अंधा व्यक्ति हितकारी बातें नहीं सुनता और अपने निकट किसी को देखता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

अहिंसा धर्म का लक्षण है।
– चाणक्य अनमोल विचार

घर आए अतिथि का विधिपूर्वक सत्कार करना चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

पुत्र की अधिक प्रशंसा नहीं करनी चाहिए।
– चाणक्य अनमोल विचार

ज्ञानी पुरुषों को संसार का भय नहीं होता।
– चाणक्य अनमोल विचार

संसार की हर वस्तु नाशवान है।
– चाणक्य अनमोल विचार

क्षमाशील व्यक्ति का तप बढ़ता रहता है।
– चाणक्य अनमोल विचार

धर्म से भी बड़ा व्यवहार है, आत्मा व्यवहार की साक्षी है।
– चाणक्य अनमोल विचार

राजा के दर्शन देने से प्रजा नष्ट हो जाती है, राजा के दर्शन देने से प्रजा सुखी होती है।
– चाणक्य अनमोल विचार

कभी भी पुरुषार्थी का अपमान नहीं करना चाहिए
-चाणक्य अनमोल विचार

क्षमाशील पुरुष को कभी दुःखी करेंए अथार्त क्षमा करने योग्य पुरुष को दुःखी करना पाप के समान है।
-चाणक्य अनमोल विचार

स्वामी द्वारा एकांत में कहे गए गुप्त रहस्यों को मुर्ख व्यक्ति प्रकट कर देते हैं।
-चाणक्य अनमोल विचार

अनुराग अर्थात प्रेम फल परिणाम से ज्ञात होता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

ज्ञान ही ऐश्वर्य का फल है।
-चाणक्य अनमोल विचार

मुर्ख व्यक्ति दान देने में दुःख का अनुभव करता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

विवेकहीन व्यक्ति महान ऐश्वर्य पाने के बाद भी नष्ट हो जाते हैं।
-चाणक्य अनमोल विचार

धैर्यवान व्यक्ति अपने धैर्ये से रोगों को भी जीत लेता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

गुणवान व्यक्ति क्षुद्रता को त्याग देता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

कमजोर शरीर में बढ़ने वाले रोग की उपेक्षा करें।
-चाणक्य अनमोल विचार

यदि खाने योग्य भोजन से पेट में बदहजमी समस्या हो जाए तो, ऐसा भोजन कभी नहीं करना चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

आवश्यकतानुसार सीमित भोजन करना ही अच्छा स्वास्थ्य प्रदान करता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

जब कार्यों की अधिकता हो, तब उस कार्य को पहले करें, जिससे अधिक फल प्राप्त होता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

शरीरिक रोग शत्रु से भी बड़ा है।
-चाणक्य अनमोल विचार

हमेशा सामर्थ्य के अनुसार ही दान दें।
-चाणक्य अनमोल विचार

चालाक और लोभी व्यक्ति बेकार में घनिष्ठता को बढ़ाते है।
-चाणक्य अनमोल विचार

लोभ बुद्धि पर छा जाता है, अर्थात लोभ ही बुद्धि विवेक को नष्ट कर देता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

अपने तथा अन्य लोगों के बिगड़े कार्यों का स्वयं निरीक्षणपरीक्षण करना चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

धूत, कपटी मूर्ख व्यक्तियों में साहस होता ही है। वे अपना साहस चोरी, चकारी, लूट, पाट, हत्या आदि रूप में इस्तेमाल करते हैं।
-चाणक्य अनमोल विचार

मूर्खों से विवाद नहीं करना चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

मुर्ख से मूर्खों जैसी ही भाषा बोलनी चाहिए।
चाणक्य अनमोल विचार

मूर्ख का कोई मित्र नहीं है।
-चाणक्य अनमोल विचार

धर्म के समान कोई मित्र नहीं है, और दया ही धर्म की जन्मभूमि है।
-चाणक्य अनमोल विचार

धर्म का आधार ही सत्य और दान है, धर्म के द्वारा ही लोक विजय होती है और मृत्यु भी
-चाणक्य अनमोल विचार

धर्म पर चलने वाले व्यक्ति की रक्षा करती है।
-चाणक्य अनमोल विचार

लोक व्यवहार में कुशल व्यक्ति ही बुद्धिमान कहलाता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

सज्जन व्यक्ति से बुरा आचरण नहीं करना चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

विनाश का उपस्थित होना सहज प्रकर्ति से ही जाना जा सकता है और अधर्म बुद्धि से आत्मविनाश की सुचना मिलती है।
-चाणक्य अनमोल विचार

चुगलखोर व्यक्ति के सम्मुख कभी गोपनीय रहस्य खोलें।
-चाणक्य अनमोल विचार

दूसरों की रहस्यमयी, गुप्त बातों को नहीं सुनना चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

पराया व्यक्ति यदि हितैषी हो तो वह भाई समान है।
-चाणक्य अनमोल विचार

धनवान व्यक्ति का सारा संसार सम्मान करता है, अर्थात धन का संचय अवश्य करें।
-चाणक्य अनमोल विचार

दरिद्र मनुष्य का जीवन मृत्यु के समान है।
-चाणक्य अनमोल विचार

अकुलीन धनिक भी कुलीन से श्रेष्ठ है।
-चाणक्य अनमोल विचार

नीच व्यक्ति को अपमान का भय नहीं होता।
-चाणक्य अनमोल विचार

कुशल लोगों को रोजगार का भय नहीं होता।
-चाणक्य अनमोल विचार

जितेन्द्रिय व्यक्ति को विषय वासनाओं का भय नहीं सताता।
-चाणक्य अनमोल विचार

कर्म करने वाले को मृत्यु का भय नहीं सताता।
-चाणक्य अनमोल विचार

साधू पुरुष किसी के भी धन को अपना ही मानते है। अर्थात धन की मांग नहीं करते।
-चाणक्य अनमोल विचार

दूसरे के धन अथवा वैभव का लालच नहीं करना चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

मृत व्यक्ति का औषधि से क्या प्रयोजन।
-चाणक्य अनमोल विचार

दूसरे के धन का लोभ नाश का कारण होता हैए दूसरे का धन किंचिद् भी नहीं चुराना चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

अकसर दूसरों के धन का अपहरण करने से स्वयं अपने ही धन का नाश हो जाता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

हर पल अपने प्रभुत्व को बनाए रखना ही कत्र्तव्य है।
-चाणक्य अनमोल विचार

निकम्मे अथवा आलसी व्यक्ति को भूख और कष्ट झेलना पड़ता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

संपन्न और दयालु स्वामी की ही नौकरी करनी चाहिए, लोभी और कंजूस स्वामी से कुछ पाना जुगनू से आग प्राप्त करने के समान है।
-चाणक्य अनमोल विचार

जाने योग्य जगहों पर जाने से यशए पुण्य और आयु क्षीण हो जाते है।
-चाणक्य अनमोल विचार

अहंकार से बड़ा मनुष्य का कोई शत्रु नहीं।
-चाणक्य अनमोल विचार

सभा के मध्य शत्रु पर क्रोध करें।
-चाणक्य अनमोल विचार

शत्रु की बुरी आदतों को सुनकर कानों को सुख मिलता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

धनहीन की बुद्धि दिखाई नहीं देतीए निर्धन व्यक्ति की हितकारी बातों को भी कोई नहीं सुनता।
-चाणक्य अनमोल विचार

विद्या से विद्वान की ख्याति होती है, यश शरीर को नष्ट नहीं करता।
-चाणक्य अनमोल विचार

जो दूसरों की भलाई के लिए समर्पित है, वही सच्चा पुरुष कहलाता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

शास्त्रों के ज्ञान से इन्द्रियों को वश में किया जा सकता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

गलत कार्यों में लगने वाले व्यक्तियों को शास्त्रज्ञान ही रोक पाते हैं।
-चाणक्य अनमोल विचार

मलेच्छ अर्थात नीच व्यक्ति की भी यदि कोई अच्छी बात हो तो अपना लेना चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

दूसरों के गुणों से ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

विष में यदि अमृत हो तो उसे भी ग्रहण कर लेना चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

विशेष स्थिति में ही पुरुष सम्मान पाता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

विद्वान और प्रबुद्ध व्यक्ति समाज के रत्न होते हैं।
-चाणक्य अनमोल विचार

रत्नों की प्राप्ति बहुत कठिन है। अर्थात श्रेष्ठ नर और श्रेष्ठ नारियों की प्राप्ति अत्यन्त दुर्लभ है।
-चाणक्य अनमोल विचार

शास्त्रों का ज्ञान आलसी को नहीं हो सकता।
-चाणक्य अनमोल विचार

स्त्री के प्रति हमेशा आसक्त रहने वाले पुरुष को तो स्वर्ग मिलता है और धर्म, और ही कर्म।
-चाणक्य अनमोल विचार

बिना प्रयत्न किए धन प्राप्ति की इच्छा करना बालू में से तेल निकालने के समान है।
-चाणक्य अनमोल विचार

गुणवान व्यक्तियों का उपहास नहीं करना चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

कार्य के लक्षण ही सफलता और असफलता के संकेत दे देते है।
-चाणक्य अनमोल विचार

हमेशा कथन के अनुसार ही उत्तर देना चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

वैभव के अनुरूप ही आभूषण और वस्त्र धारण करना चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

अपने कुल अर्थात वंश के अनुसार ही व्यवहार करें।
-चाणक्य अनमोल विचार

कार्य के अनुरूप प्रयत्न करें।
-चाणक्य अनमोल विचार

पात्र के अनुरूप दान दें।
-चाणक्य अनमोल विचार

उम्र के अनुरूप ही वेश धारण करें।
-चाणक्य अनमोल विचार

सेवक को स्वामी के अनुकूल काम करने चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

शिष्य को गुरु के वश में रहकर कार्य करना चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

पुत्र को पिता के अनुकूल आचरण करना चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

अत्यधिक आदरण्सत्कार से शंका उत्पन्न हो जाती है।
-चाणक्य अनमोल विचार

स्नेह करने वालों का रोषगुस्सा अल्प समय के लिए होता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

मुर्ख धूर्त व्यक्ति को अपने दोष दिखाई नहीं देतेए उसे दूसरे के दोष ही दिखाई देते हैं।
-चाणक्य अनमोल विचार

शांत व्यक्ति सबको अपना बना लेता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

बुरे व्यक्ति पर क्रोध करने से पहले अपने आप पर ही क्रोध करना चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

बुद्धिमान व्यक्ति को मुर्ख, मित्र, गुरु और अपने प्रियजनों से वाद विवाद नहीं करना चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

ऐश्वर्य पैशाचिकता के समान होता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

जो व्यक्ति जिस कार्य में कुशल और मन से तीव्र इच्छा होए उसे उसी कार्य में लगाना चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

प्रत्येक अवस्था में सर्वप्रथम माता का भरण पोषण करना चाहिए। अर्थात माता सर्वश्रेष्ठ है।
-चाणक्य अनमोल विचार

स्त्री का आभूषण लज्जा है, ब्राह्मणों का आभूषण वेद है, सभी व्यक्तियों का आभूषण धर्म है, और विनय से युक्त विद्या सभी आभूषणों की आभूषण है।
-चाणक्य अनमोल विचार

शांतिपूर्ण देश में ही रहें, जहां सज्जन रहते होंए वहीं बसें।
-चाणक्य अनमोल विचार

राजदासी से कभी शारीरिक सम्बन्ध नहीं बनाने चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

राजधन की ओर आँख उठाकर भी नहीं देखना चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

पुत्र के गुणवान होने से परिवार स्वर्ग बन जाता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

पुत्र को सभी विद्याओं में क्रियाशीलनिपुर्ण बनाना चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

गुणी पुत्र मातापिता की दुर्गति नहीं होने देता।
-चाणक्य अनमोल विचार

एक ही गुरुकुल में पढ़ने वाले छात्रछात्राओं का ज्यादा निकट संपर्क ब्रह्मचर्य को नष्ट कर सकता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

पराए खेत में बीज डाले, अर्थात पराई स्त्री से सम्भोग करें।
-चाणक्य अनमोल विचार

विनाश काल आने पर दवा की बात कोई नहीं सुनता।
-चाणक्य अनमोल विचार

देहधारी व्यक्ति को सुख.दुःख की कोई कमी नहीं रहती।
-चाणक्य अनमोल विचार

सज्जन तिल बराबर उपकार को भी पर्वत के समान बड़ा मानकर चलता है, अर्थात सज्जनों का उपकार करना चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

दुष्ट व्यक्ति पर उपकार नहीं करना चाहिए, उपकार का बदला चुकाने के भय से दुष्ट व्यक्ति शत्रु बन जाता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

आंखों के समान कोई ज्योति नहींए और आँखों के बिना शरीर क्या है।
-चाणक्य अनमोल विचार

जल में मूत्र त्याग करें और नग्न होकर जल में प्रवेश करें।
-चाणक्य अनमोल विचार

जैसा शरीर होता है वैसा ही ज्ञान होता है, जैसी बुद्धि होती है, वैसा ही वैभव होता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

स्त्री के बंधन से मोक्ष पाना अति दुर्लभ है, सभी अशुभों का क्षेत्र स्त्री है।
-चाणक्य अनमोल विचार

वेदों से बाहर कोई धर्म नहीं है।
-चाणक्य अनमोल विचार

धर्म का विरोध कभी करें।
-चाणक्य अनमोल विचार

सत वाणी से स्वर्ग प्राप्त होता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

सत्य से बढ़कर कोई तप नहीं, और सत्य से स्वर्ग की प्राप्ति होती है।
-चाणक्य अनमोल विचार

सत्य विश्वास पर संसार टिका हुआ है।
-चाणक्य अनमोल विचार

गुरुओं की आलोचना नहीं करें।
-चाणक्य अनमोल विचार

दुष्ट व्यक्ति का कोई मित्र नहीं होता।
-चाणक्य अनमोल विचार

दानवीर ही सबसे बड़ा वीर है।
-चाणक्य अनमोल विचार

विनय ही सबका आभूषण है।
-चाणक्य अनमोल विचार

जो कुलीन होकर भी विनीत है, वह श्रेष्ठ कुलीनों से भी बढ़कर होता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

याचकों का अपमान अथवा उपेक्षा नहीं करनी चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

दुर्जन व्यक्ति के साथ अपने भाग्य को नहीं जोड़ना चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

सदाचार व्यवहार से मनुष्य का यश और आयु दोनों बढ़ती है।
-चाणक्य अनमोल विचार

अपने व्यवसाय में सफल नीच व्यक्ति को भी साझीदार नहीं बनाना चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

पुरुष के लिए कल्याण का मार्ग अपनाना ही उसके लिए जीवन शक्ति रूप है।
-चाणक्य अनमोल विचार

कठिन कार्य करवा लेने के उपरान्त भी नीच व्यक्ति कार्य करने वाले का अपमान ही करता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

किये गये कृतघ्न अर्थात उपकार मानने वाले व्यक्ति को नरक ही प्राप्त होता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

उन्नति और अवनति हमेशा वाणी के अधीन होते हैं।
-चाणक्य अनमोल विचार

झूठे अथवा दुर्वचन शब्द लम्बे समय तक स्मरण रहते है। अर्थात हमेशा सत्य बोलें।
-चाणक्य अनमोल विचार

जिन वचनो से हितोषी राजा के प्रति द्वेष उत्पन्न होता होए ऐसे वाणी नहीं बोलने चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

प्रिय और संगत वचन बोलने वाले का कोई शत्रु नहीं होता।
-चाणक्य अनमोल विचार

जो मांगता है, उसका कोई गौरव नहीं होता।
-चाणक्य अनमोल विचार

सौभाग्य ही स्त्री का आभूषण है।
-चाणक्य अनमोल विचार

शत्रु की जीविका भी नष्ट नहीं करनी चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

बहुत पुराना नीम का पेड़ होने पर भी उससे सरौता नहीं बन सकता।
-चाणक्य अनमोल विचार

जुगनू कितना भी चमकीला हो, परन्तु उससे आग का काम नहीं लिया जा सकता।
-चाणक्य अनमोल विचार

समृद्धता से कोई गुणवान नहीं हो जाता।
-चाणक्य अनमोल विचार

बिना प्रयत्न के जहां जल उपलब्ध होए वही कृषि करनी चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

जैसा बीज होता है, वैसा ही फल होता हैए अर्थात अच्छे कर्म करने पर अच्छे फल की आशा की जा सकती है।
-चाणक्य अनमोल विचार

जैसी शिक्षा, वैसी बुद्धि।
-चाणक्य अनमोल विचार

जैसा कुल, वैसा आचरण।
-चाणक्य अनमोल विचार

शुद्ध किया हुआ नीम भी आम नहीं बन सकता, अर्थात कडुवे वचन दोबारा वापस नहीं आते।
-चाणक्य अनमोल विचार

जो सुख मिला है, उसे छोड़े।
-चाणक्य अनमोल विचार

मनुष्य स्वयं ही दुःखों को बुलाता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

लोक व्यवहार शास्त्रों के अनुकूल होना चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

पराए धन को छीनना अपराध है।
-चाणक्य अनमोल विचार

किसी कार्य आरम्भ करने से पहले विद्वान और अनुभवी लोगों से पूछना चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

अकारण किसी के घर में प्रवेश करें।
-चाणक्य अनमोल विचार

शास्त्रों के जानने पर श्रेष्ठ पुरुषों के आचरणों के अनुसार आचरण करें।
-चाणक्य अनमोल विचार

शास्त्रशिष्टाचार से बड़ा नहीं है।
-चाणक्य अनमोल विचार

जिसके द्वारा जीवनयापन होता है, उसकी निंदा नहीं करनी चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

इन्द्रियों को वश में करना ही तप का सार है।
-चाणक्य अनमोल विचार

स्त्री के बंधन से छूटना अथवा मोक्ष पाना अत्यंत कठिन है।
-चाणक्य अनमोल विचार

स्त्री का नाम सभी अशुभ घटनाओं से जुड़ा हुआ है।
-चाणक्य अनमोल विचार

तीन वेदों ऋग, यर्जु साम को जानने वाला व्यक्ति ही यज्ञ के फल को जानता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

समस्त दुखों को नष्ट करने की औषधि मोक्ष है, मोक्ष सत्य, निष्कपट, त्याग, सदाचार, सत्संग और उत्तम विचारों का अनुसरण करने से प्राप्त होता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

दुर्वचनों से कुल का नाश हो जाता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

विवाद के समय धर्म के अनुसार कार्य करना चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

प्रातःकाल उठकर ही दिन भर के कार्यों के बारें में विचार समीक्षा कर लेनी चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

विनाशकाल आने पर व्यक्ति अनीति करने लगता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

दान जैसा कोई वशीकरण मन्त्र नहीं है।
-चाणक्य अनमोल विचार

पराई वस्तु को पाने की लालसा नहीं रखनी चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

दुर्जन व्यक्तियों द्वारा संगृहीत सम्पति का उपभोग दुर्जन ही करते है।
-चाणक्य अनमोल विचार

जिस प्रकार बालू अपने रूखे स्वभाव नहीं छोड़ सकता, उसी प्रकार दुष्ट व्यक्ति भी अपना स्वभाव नहीं छोड़ पाता।
-चाणक्य अनमोल विचार

सज्जन दुर्जनों में विचरण नही करते।
-चाणक्य अनमोल विचार

हंस पक्षी श्मशान में नहीं रहता। अर्थात ज्ञानी व्यक्ति भी मुर्ख और दुष्ट व्यक्तियों के पास बैठना पसंद नहीं करते।
-चाणक्य अनमोल विचार

समस्त संसार धन के पीछे लगा है। धन केवल जरूरतों के अनुसार एकत्र करना चाहिए, अन्यथा अधिक धन विपरीत स्थिति में विनाशकारी हो सकता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

निर्धन होकर जीने से तो मर जाना अच्छा है।
-चाणक्य अनमोल विचार

आशा लज्जा को दूर कर देती है अर्थात मनुष्य को निर्लज्ज बना देती है।
-चाणक्य अनमोल विचार

आत्मस्तुति अर्थात व्यक्ति को अपनी प्रशंसा अपने ही मुख से नहीं करनी चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

दिन में स्वप्न नहीं देखने चाहिए, दिन में सोने से आयु कम होती है।
-चाणक्य अनमोल विचार

धन के नशे में अंधा व्यक्ति हितकारी बातें नहीं सुनता और अपने निकट किसी को देखता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

श्रेष्ठ स्त्री के लिए पति ही परमेश्वर के समान होता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

घर आए अतिथि का विधिपूर्वक सत्कार करना चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

दिया गया दान कभी नष्ट नहीं होता।
-चाणक्य अनमोल विचार

लोभ द्वारा शत्रु को भी भ्रष्ट किया जा सकता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

बुद्धिहीन व्यक्ति निकृष्ट साहित्य के प्रति मोहित होते है।
-चाणक्य अनमोल विचार

श्रेष्ठ व्यक्ति अपने समान ही दूसरों को समझता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

रूप के अनुसार ही गुण होते है।
-चाणक्य अनमोल विचार

जहां सुख शांति से रहा जा सकेए वही स्थान श्रेष्ठ है।
-चाणक्य अनमोल विचार

श्रेष्ठ और सुहृदय व्यक्ति अपने आश्रित के दुःख को अपना ही दुःख समझते है।
-चाणक्य अनमोल विचार

नीच घृत व्यक्ति ह्र्दयगत बात को छिपाकर कुछ और ही बात कहता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

पुत्र की अधिक प्रशंसा नहीं करनी चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

सेवकों को अपने स्वामी का गुणगान करना चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

राजा की आज्ञा का कभी उल्लंघन करे, अपनी सेवाओं से स्वामी की कृपा पाना सेवकों का धर्म है।
-चाणक्य अनमोल विचार

नीच लोगों की कृपा पर निर्भर होना व्यर्थ है।
-चाणक्य अनमोल विचार

बुद्धिमानों के शत्रु नहीं होते।
-चाणक्य अनमोल विचार

क्षमाशील व्यक्ति का तप बढ़ता रहता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

बल प्रयोग के स्थान पर क्षमा दान करना अधिक प्रशंसनीय होता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

धर्म को व्यावहारिक होना चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

लोक चरित्र को समझना सर्वज्ञता कहलाती है।
-चाणक्य अनमोल विचार

समस्त तत्त्वों का ज्ञान ही शास्त्र का प्रयोजन है, और कर्म करने से ही तत्त्वज्ञान को समझा जा सकता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

धर्म से भी बड़ा व्यवहार है, आत्मा व्यवहार की साक्षी है।
-चाणक्य अनमोल विचार

झूठी गवाही देने वाला नरक जाने के समान है,
व्यक्ति के मन में क्या है, यह उसके व्यवहार से प्रकट हो जाता है।
-चाणक्य अनमोल विचार

चोर और राज कर्मचारियों से धन की रक्षा करनी चाहिए।
-चाणक्य अनमोल विचार

राजा के दर्शन देने से प्रजा नष्ट हो जाती है, राजा के दर्शन देने से प्रजा सुखी होती है।
अहिंसा धर्म का लक्षण है।
-चाणक्य अनमोल विचार

संसार की हर वस्तु नाशवान है।
-चाणक्य अनमोल विचार

ज्ञानी पुरुषों को संसार का भय नहीं होता।
-चाणक्य अनमोल विचार

कोई काम शुरू करने से पहले, अपने आप तीन प्रश्न कीजिये, मैं ये क्यों कर रहा हूँ, इसके परिणाम क्या हो सकते हैं और क्या मैं सफल होऊंगा, और जब गहराई से सोचने पर इन प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर मिल जायें, तभी आगे बढिए।

-चाणक्य अनमोल विचार

जैसे ही भय आपके करीब आये, उस पर आक्रमण कर उसे नष्ट कर दीजिये, अर्थात भय व्यक्ति को खुद नाजुक करता है।

-चाणक्य अनमोल विचार

व्यक्ति अपने कार्यों से महान होता है, ना कि अपने जन्म से।

-चाणक्य अनमोल विचार

सबसे बड़ा गुरु मन्त्र है, कभी भी अपनी सफलता का राज़ दूसरों को मत बताए,ए दूसरे आपको बर्वाद कर सकते हैं।

-चाणक्य अनमोल विचार

दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति नौजवानी और औरत का सौंदर्य है। यह दोनों बहुत कुछ बदल देते हैं।

-चाणक्य अनमोल विचार