ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग Omkareshwar Jyotirlinga in Hindi

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग महत्व और इतिहास / Omkareshwar Jyotirlinga
पुराणों में स्कन्द पुराण, शिवपुराण व वायुपुराण में ओम्कारेश्वर की महिमा का उल्लेख है। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का वर्णन शिवपुराण के 18वें अध्याय में विस्तृत रूप में मिलता है। पवित्र ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग शिवपुरी इंदौर मध्यप्रदेश में स्थापित है। यह नर्मदा उत्तरी तट पर विराजमान है। यहां पर दो ज्योतिर्लिंगों ओंकारेश्वर और अमलेश्वर की पूजा अर्जना एक साथ की जाती है। ओंकारेश्वर को संकटमोचन भी कहा जाता है। कहा जाता है कि तीनों लोकों का भ्रमण करके के बाद भगवान शिव यहाँ विश्राम करते हैं। यहां पर तीन तरह से विशेष आरती होती है। हर तरह की समस्याओं से मुक्ति पाने के लिए पंचमुखी ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग खास फलदायी है। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन के लिए भक्त देश विदेश से आते हैं।

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ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग कथा
पुराण ग्रन्थों अनुसार एक नारद जी भ्रमण करते हुए पर्वतराज विंध्याचल पर्वत पहुंचे। पर्वतराज विंध्याचल ने नारद जी का आदर सत्कार किया। और बोल पड़े कि मेरे पास हर सम्पदा है, अर्थात मैं सर्वगुण सम्पन्न हूं। यह अभिमान युक्त बातें सुनकर नारद जी शांत खड़े रहे। फिर मुस्कुराते हुए कहा कि तुम सुमेरू पर्वत से ऊंचे नहीं हो। सुमेरू पर्वत की चोटी देवता लोक तक पहुंचती है। और तुम कभी भी सुमेरू पर्वत की बराबरी नहीं कर सकते।
तद्पश्चात पर्वतराज विंध्याचल दुःखी हो गये। फिर उन्होंने दुःख निवारण के लिए भगवान शिव की तपस्या करने का निश्चय किया। और पाषाण शिवलिंग बनाकर 6 महीने तक घोर तपस्या की। पर्वतराज विंध्याचल की तपस्या अराधना से भगवान शिव अतिप्रसन्न हुए, और उन्होंने पर्वतराज विंध्याचल से बरदान मांगने को कहा। 
पर्वतराज विंध्याचल ने भगवान शिव से सद् बुद्धि और कार्य सिद्ध का बरदान मांगा। इस पर भगवान शिव और भी प्रसन्न हुए। अन्य भक्त अमर, अजेय, अमरत्व जैसे बरदान मांगते हैं, परन्तु तुम ने बड़ी चतुराई से सद् बुद्धि और कार्य सिद्ध का सर्वगुण सम्पन्न बरदान मांग लिया। अर्थात् भगवान शिव को विंध्याचल पर्वत बसना था। उसी क्षण सभी देवता और ऋषि भी प्रकट हुए, सब ने भगवान शिव को सदा के लिए विंध्याचल पर विराजमान होने के लिए प्रार्थना याचना करने लगे। तब से भगवान शिव ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में यहां विराजमान रहते हैं।

दूसरी कथा
राजा मान्धाता भगवान शिव के अन्नय भक्त थे। उनके विंध्या घोर तपस्या से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न किया। बरदान के रूप में राजा मान्धाता ने भगवान शिव को समस्त देवी देवताओं के साथ विंध्याचल में विराजमान होने के लिए प्रार्थना याचना की थी। कहते हैं तब से भगवान शिव 33 करोड़ देवी देवताओं के साथ यहां बसते हैं। और यहां 68 तीर्थ स्थल भी हैं। यहां पवित्र नर्मदा बहती है। नर्मदा समस्त पापा का नाश करने वाली भी मानी जाती है। नर्मदा को प्राचीन काल में नरबुदा से भी जाना जाता था।

तीसरी कथा
कालान्तर में दानव राक्षसगण बहुत अधिक शक्तिशाली हो गये। और दानवों ने पृथवी और स्वर्गलोक में उत्पात मचाया था। जिससे धर्म की क्षति हो रही थी। तीनों लोकों में हाहाकर मच गया। इस पर सभी देवताओं ने दानवों पर आक्रमण कर दिया। परन्तु देवता पराजित हुए। देवतागण हार से अति दुःखी हुए। और तपस्या में विलीन भगवान शिव की पूजा अचना और धर्म रक्षा हेतु याचना करने लगे। भगवान शिव ज्योतिर्लिंग से प्रकट हुए, और उनके तेज से सारी राक्षस सेना भस्म हो गई। कहा जाता है कि जब से यहां पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थापित है।
और इसी मन्दिर में कुबेर धनपति बनने के लिए भगवान शिव की तपस्या की थी। और भगवान शिव के बालों से काबेरी नदीं निकली थी। काबेरी नदी से कुबेर ने पवित्र स्नान किया था। काबेरी ओमकार पर्वत पर घूमती हुई नर्मदा में संगम करती है। जिसे श्रद्धालु नर्मदा-काबेरी संगम भी कहते हैं।

ओंकारेश्वर विशेष आरती
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में तीन तरह की आरती होती हैं। जिन्हें मंगला आरती, मध्यह्नन आरती और शयन आरती कहा जाता है। इन पवित्र विशेष आरती में तीन अलग-अलग राजाओं के वंशज और तीन अलग - अलग पुरोहितों द्धारा की जाती है। हर बार अलग-अलग तरीकों से सजाया जाता है। यह बहुत ही दुर्लभ दृश्य होता है। 

मंगला आरती
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में मंगला आरती सुबह 5.00 बजे से 5.30 बजे तक होती है। तद्पश्चात भक्त लोग ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का दर्शन करते हैं। जिसे पुरोहित और भाग्यशाली राजा मांधाता वंशज भक्त करते हैं। 

मध्यह्नन आरती
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में मध्याह्न आरती दोपहर 12.20 बजे से 1.15 बजे तक की जाती है। तद्पश्चात भक्तों को दर्शन की अनुमति होती है। यह आरती राजा सिंधिया के वंशज और पुरोहित मिलकर करते हैं।

शयन आरती
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में शयन आरती शाम को 8.30 बजे से 9.00 बजे रात तक की जाती है। इसके बाद भक्तजन दर्शन करते हैं। श्रद्धालु 10.30 बजे तक दर्शन कर सकते हैं। परन्तु विशेष अवसरों पर देर रात तक भक्त पूजा अर्जना दर्शन करते हैं। यह शयन आरती होलकर वंशज और पुरोहित मिलकर करते हैं।

आरती के दौरान श्रद्धालुओं ज्योतिर्लिंग कपाल से दूर किये जाते हैं और साथ ही मन्दिर के कैमरे भी बंद कर दिये जाते हैं।

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन की सुविधाएं
वायुमार्ग 
अलग अलग राज्यों से सीधे इंदौर पहुंच सकते हैं। इंदौर से ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग लगभग 75 किमी. दूर है। इंदौर से ओंकारेश्वर के लिए सीधे बस एवं टैक्सी सेवाएं उपलब्ध होती हैं।

रेलमार्ग
ओंकारेश्वर नजदीक मोटरक्का खंडवा रेवले स्टेशन है। यहां से भी ओंकारेश्वर के लिए सीधे बस एवं टैक्सी सेवाएं उपलब्ध होती हैं।

सड़क मार्ग
ओंकारेश्वर के लिए इंदौर, खंडवा, उज्जैन और भारती के विभिन्न राज्यों से सीधे बस और टैक्सी सेवाएं उपलब्ध हैं। विशेष पर्व मौके पर भक्तजन अपनी सुविधा अनुसार परिवहन इस्तेमाल करते हैं। ओंकारेश्वर आने जाने वाली आसपास डबल मार्ग बने हैं। जिससे ट्रेफिक नहीं होता।

श्रद्धालुओं के लिए ठहरने की व्यवस्था
यहां पर भारत व विश्वभर से हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। ओमकारेश्वर मन्दिर के नजदीक, इंदौर, खड़वा आदि जगहों पर श्रद्धालुओं के लिए 50 से अधिक धर्मशालाएं, होटल, विश्रामघर बने हैं। धर्मशालाएं और विश्रामघर श्रद्धालुओं की व्यवस्था के अनुसार बनाये गये हैं। होटल आॅनलाईन बुक करा सकते हैं।

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